कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने 23 अक्टूबर को अमेरिकी चुनाव में कनाडाई हस्तक्षेप के आरोपों को निराधार बताया। रॉयटर्स और कैनेडियन प्रेस के अनुसार, इस्तांबुल में उन्होंने अमेरिकी राजदूत पीट होक्स्ट्रा से निराशा जताई। ये आरोप वॉशिंगटन की ओर से लगाए गए थे और कनाडा की सरकार ने उन्हें स्वीकार नहीं किया है। यह विवाद अमेरिका में तीन नवंबर के मध्यावधि चुनाव से पहले सामने आया है।
अमेरिकी दूतावास ने बुधवार को आरोप लगाया कि कनाडाई मंत्रियों और प्रांतीय नेताओं ने अमेरिकी राजनीति को प्रभावित करने की योजनाएं बताई थीं। एपी के अनुसार, उसने उद्योग मंत्री मेलानी जोली की जवाबी शुल्क संबंधी चर्चा और ओंटारियो के प्रमुख डग फोर्ड के शुल्क विरोधी विज्ञापन का उल्लेख किया, जिसमें रोनाल्ड रीगन थे। कार्नी ने वॉशिंगटन के इन आरोपों को नकारा।
कैनेडियन प्रेस के अनुसार, कनाडा के विदेश मंत्रालय ने मंगलवार को राजनयिकों को चुनावी उम्मीदवारों के साथ बैठकों और कार्यक्रमों से दूर रहने को कहा। कार्नी ने कहा कि अमेरिका में कनाडा के व्यापक संपर्क हैं, लेकिन वह चुनावी हस्तक्षेप का आभास देने से भी बचता है। उन्होंने इस सावधानी को कनाडा की राजनयिक कार्यप्रणाली का हिस्सा बताया।
रॉयटर्स ने विवाद को अगस्त में व्यापार वार्ता टूटने के बाद तनावपूर्ण संबंधों से जोड़ा। कार्नी ने कहा कि उन्हें नहीं लगता कि रिपब्लिकन की चुनावी हार अतिरिक्त अमेरिकी शुल्क का आधार बनेगी। फिर भी उन्होंने संकेत दिया कि कनाडा अनुपयुक्त समझौता स्वीकार करने के बजाय महीनों या अगली अमेरिकी सरकार तक भी इंतजार करेगा।
इस यात्रा में ओटावा की साझेदारियां विविध बनाने की कोशिश भी सामने आई। कार्नी के कार्यालय ने 23 अक्टूबर को बताया कि कनाडा और तुर्किये ने व्यापार, रक्षा और ऊर्जा पर रणनीतिक साझेदारी शुरू की है। मुक्त व्यापार वार्ता का पहला दौर अंकारा में 30 नवंबर से चार दिसंबर 2026 तक होगा।
कैनेडियन प्रेस के अनुसार, कार्नी ने कहा कि अमेरिका सद्भावना से बातचीत करे तो कनाडा वार्ता दोबारा शुरू करने को तैयार है। चुनाव से पहले समझौता संभव होगा या नहीं, यह वॉशिंगटन पर निर्भर है। उनके बयान से व्यापारिक समाधान का समय अनिश्चित रहा और कनाडा ने चुनावी हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज करने का रुख कायम रखा।
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