यूरोपीय शहरों में 2026 की गर्मियों के दौरान गर्मी से अनुमानित 50,391 मौतों में लगभग दो तिहाई मानवजनित तापवृद्धि से जुड़ी थीं। इंपीरियल कॉलेज लंदन और लंदन स्कूल ऑफ हाइजीन एंड ट्रॉपिकल मेडिसिन ने 23 अक्टूबर को जारी शोध में यह आकलन किया। विश्लेषण जीवाश्म ईंधन के उत्सर्जन को शहरों में बढ़ती मृत्यु संख्या से जोड़ता है।
शोधकर्ताओं ने यूरोपीय संघ के 27 देशों, ब्रिटेन, नॉर्वे और स्विट्जरलैंड के 854 शहरी क्षेत्रों में जून से अगस्त का अध्ययन किया। इनमें अध्ययन के 30 देशों की लगभग 40% आबादी रहती है। इसलिए अनुमान चुनिंदा शहरी आबादी का है, पूरे महाद्वीप का नहीं। इन महीनों के बाहर की गर्मी की घटनाएं भी इसमें शामिल नहीं हैं।
दल ने मौसम के अवलोकनों और जलवायु मॉडलों को तापमान, उम्र और मृत्यु दर के स्थापित संबंधों से जोड़ा। मौजूदा परिस्थितियों की तुलना मानवजनित तापवृद्धि रहित एक काल्पनिक दुनिया से की गई। इंपीरियल की रिपोर्ट में कुल अनुमान 50,391 है; एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार अतिरिक्त तापवृद्धि से जुड़ा हिस्सा 32,619 है।
ये सांख्यिकीय अनुमान हैं, उन मृत्यु प्रमाणपत्रों की गिनती नहीं जिनमें गर्मी को कारण बताया गया हो। लंदन स्कूल के अनुसार गणना प्रभावित आबादी और तापमान तथा मृत्यु दर के ऐतिहासिक संबंधों की मान्यताओं पर निर्भर है। ऐसी विधियों के पूर्व अनुमान बाद में राष्ट्रीय अधिकारियों के आंकड़ों के करीब रहे हैं, लेकिन इससे मौजूदा नतीजों की अनिश्चितता समाप्त नहीं होती।
स्कूल के अनुसार लगभग एक तिहाई अनुमानित मौतें 17 जून से 1 जुलाई के बीच हुईं, जब क्षेत्रीय दैनिक तापमान औसतन 1991–2020 के आधार स्तर से 5 डिग्री सेल्सियस से अधिक ऊंचा था। सबसे अधिक असर बुजुर्गों पर पड़ा, हालांकि लगभग 6,000 अनुमानित मौतें 65 वर्ष से कम उम्र वालों की थीं। ब्रिटेन के 135 शहरी क्षेत्रों में अनुमान लगभग 4,500 रहा।
लेखकों ने ग्रीनहाउस गैसें घटाने और गर्मी से सुरक्षा बढ़ाने की मांग की है, जिसमें चेतावनी प्रणालियां, बेहतर घर और स्वास्थ्य सुविधाएं तथा शहरों में अधिक छाया और हरियाली शामिल हैं। स्कूल के शोधकर्ता पियरे मासेलो ने कहा कि शहर बढ़ते तापमान के लिए पर्याप्त अनुकूलित नहीं हैं। प्रमुख लेखिका क्लेयर बार्न्स ने जीवाश्म ईंधन का उपयोग घटाने और अत्यधिक गर्मी से सबसे अधिक जोखिम वाले लोगों की लक्षित सुरक्षा पर जोर दिया।
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