कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य में इबोला के 9,066 पुष्ट मामले और 4,381 मौतें दर्ज हुई हैं। रॉयटर्स और एसोसिएटेड प्रेस ने 13 अक्टूबर को सरकारी आंकड़ों के आधार पर यह जानकारी दी। नया आंकड़ा मई में घोषित प्रकोप को रोकने की लगातार मुश्किलों को दर्शाता है, जबकि संक्रमण कई केंद्रों में फैल रहा है।
रॉयटर्स के अनुसार यह महामारी अब कांगो के इतिहास की सबसे बड़ी और घातक महामारी है, जिसने 2018–2020 के प्रकोप को पीछे छोड़ दिया है। इसका कारण बुंदीबुग्यो वायरस है, जिसके लिए कोई टीका या विशिष्ट उपचार स्वीकृत नहीं है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार शोधकर्ता आशाजनक संभावित विकल्पों का परीक्षण कर रहे हैं।
एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार सात प्रांतों के 65 स्वास्थ्य क्षेत्र प्रभावित हैं और कई मौतें उपचार केंद्रों के बाहर हो रही हैं। एजेंसी से बात करने वाले अधिकारियों का अनुमान है कि पुष्ट संक्रमण कुल मामलों का लगभग एक तिहाई हैं। इसका अर्थ है कि घोषित आंकड़ा संक्रमण के पूरे विस्तार को नहीं दिखाता।
विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार मानवीय संकट, असुरक्षा और लोगों तथा सामान की व्यापक आवाजाही से प्रतिक्रिया कठिन हो रही है। प्रकोप संबंधी उसका विवरण दूरदराज और घनी आबादी वाले, दोनों क्षेत्रों की चुनौतियां बताता है। इन परिस्थितियों में निगरानी और प्रभावित समुदायों तक पहुंच संक्रमण रोकने के प्रयासों के केंद्र में हैं।
क्षेत्रीय प्रभाव भी अहम है। रॉयटर्स के अनुसार युगांडा में इस साल 20 मामले और दो मौतें दर्ज हुईं, जिसके बाद अगस्त में उसे इबोला मुक्त घोषित किया गया। केन्या ने पिछले सप्ताह अपने पहले आयातित मामले की पुष्टि की: एक केन्याई नागरिक कांगो से युगांडा होकर आया था और नैरोबी में उसकी मृत्यु हुई।
संगठन का कहना है कि वह निगरानी, संपर्कों की खोज, चिकित्सकीय तैयारी, रोगियों की देखभाल और आपूर्ति के साथ सीमापार तैयारी में मदद बढ़ा रहा है। उसने प्रकोप नियंत्रण के लिए समुदायों की भागीदारी को भी जरूरी बताया है। इन उपायों के साथ संभावित टीकों और उपचारों का परीक्षण जारी है; संगठन का विवरण बुंदीबुग्यो के लिए किसी स्वीकृत उत्पाद की घोषणा नहीं करता।
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