एएफपी के अनुसार, अर्मेनिया के येरेवान में कॉप17 जैव विविधता सम्मेलन के निर्धारित अंतिम दिन, 30 अक्टूबर को भी सरकारें प्रकृति की रक्षा के प्रमुख उपायों पर सहमत नहीं थीं। 19 अक्टूबर से जारी बातचीत में हानिकारक सब्सिडी, संरक्षण के वित्तपोषण और संयुक्त राष्ट्र के एक कोष में कंपनियों के योगदान पर मतभेद बने रहे। वैश्विक समीक्षा से निकलने वाली सिफारिशें भी लंबित थीं।
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के अनुसार, यह सम्मेलन कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता रूपरेखा के तहत सामूहिक प्रगति की पहली वैश्विक समीक्षा है। वर्ष 2022 में सहमत इस रूपरेखा में 2030 के लिए 23 लक्ष्य हैं, जिनमें 30 प्रतिशत भूमि और महासागरों की रक्षा शामिल है। बैठक उस समयसीमा के आधे पड़ाव पर क्रियान्वयन का आकलन करती है, मूल रूपरेखा पर फिर से बातचीत नहीं करती।
एएफपी के अनुसार, यूरोपीय संघ ने चीन सहित समृद्ध उभरती अर्थव्यवस्थाओं से जैव विविधता संरक्षण के वित्तपोषण में योगदान देने को कहा है, लेकिन बातचीत अटकी हुई है। प्रतिनिधियों को काली कोष में सुधार पर भी कठिनाई हो रही है। इसका उद्देश्य कंपनियों द्वारा पौधों और अन्य जीवों के आनुवंशिक आंकड़ों के उपयोग से होने वाले लाभ साझा करना है। ये वित्तीय विवाद अधूरी वार्ता का हिस्सा बने हुए हैं।
इस वार्ता का महत्व संरक्षित क्षेत्रों से आगे जाता है। अंतरराष्ट्रीय सतत विकास संस्थान के अनुसार, प्रकृति और पारिस्थितिकी तंत्र की सेवाएं खाद्य प्रणालियों, आजीविका, अर्थव्यवस्थाओं और सुरक्षा का आधार हैं। संस्थान जैव विविधता के नुकसान को बढ़ाने वाले आर्थिक प्रोत्साहनों में सुधार, अधिक धन और प्रकृति, जलवायु तथा भूमि पर समन्वित कार्रवाई को प्रतिबद्धताओं से व्यावहारिक परिणाम प्राप्त करने की प्राथमिकताएं बताता है।
एएफपी के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र की जैव विविधता प्रमुख एस्ट्रिड शोमाकर ने देशों से सम्मेलन समाप्त होने से पहले साझा आधार खोजने का आग्रह किया। ग्रीनपीस इंटरनेशनल की आइरीन वाबीवा ने 29 अक्टूबर को कहा कि बातचीत से अभी ठोस प्राथमिकताएं सामने नहीं आई हैं। ये टिप्पणियां परिणाम हासिल करने का दबाव दिखाती हैं; इनसे यह साबित नहीं होता कि प्रतिनिधियों ने अंतिम पैकेज पर सहमति बना ली है।
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के अनुसार, देश वैश्विक समीक्षा के जवाब में क्रियान्वयन तेज करने के लिए येरेवान कार्यपथ पर बातचीत कर रहे हैं। अर्मेनियाई अध्यक्षता ने भी इसका उद्देश्य आकलन को व्यावहारिक समाधानों से जोड़ना बताया है। सम्मेलन का समापन 30 अक्टूबर को निर्धारित है। सरकारों को लंबित मसौदों का समाधान करना और तय करना है कि समीक्षा के बाद कौन सी सामूहिक कार्रवाई होगी।
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