चेक गणराज्य में 17 अक्टूबर 2026 को मतदान समाप्त होने के बाद विपक्षी दलों ने सीनेट पर नियंत्रण बनाए रखा, जबकि प्रधानमंत्री आंद्रेई बाबिश की एएनओ को उन सीटों में से एक भी नहीं मिली जिन पर उसने चुनाव लड़ा था। रॉयटर्स और एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार यह परिणाम प्राग में सत्तारूढ़ गठबंधन के लिए चुनावी झटका है।
एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार विपक्षी दलों से सीधे जुड़े उम्मीदवारों ने 81 सदस्यीय सदन में चुनाव वाली 27 में से 22 सीटें जीतीं। एएनओ के गठबंधन सहयोगियों को भी कोई सीट नहीं मिली। हालांकि चुनाव के बाद एएनओ के पास अब भी 14 सीनेटर हैं; इस बार जीत नहीं मिलने का अर्थ उच्च सदन से पार्टी का समाप्त हो जाना नहीं है।
रॉयटर्स के मुताबिक यूरोप समर्थक मेयर्स एंड इंडिपेंडेंट्स पार्टी ने अपनी 14 प्रतिस्पर्धी सीटों में से 10 जीतीं, जिनमें पहले दौर की दो जीत शामिल हैं। सिविक डेमोक्रेट्स को सात सीटें मिलीं। पिछले सप्ताहांत के शुरुआती मतदान के बाद शुक्रवार और शनिवार को दूसरे दौर का मतदान हुआ, जिसमें भागीदारी कम रही।
अक्टूबर 2025 के संसदीय चुनाव के बाद सत्ता में लौटे बाबिश के लिए यह चुनाव एक परीक्षा था। रॉयटर्स ने बताया कि उनकी सरकार ने यूक्रेन को प्रत्यक्ष सरकारी सैन्य सहायता बंद की है और यूरोपीय संघ की जलवायु नीतियों का विरोध किया है। ये रुख चुनाव की राजनीतिक पृष्ठभूमि का हिस्सा हैं।
इस परिणाम से सरकार का नियंत्रण विपक्ष को सौंपे बिना उसकी संस्थागत भूमिका बनी रहती है। रॉयटर्स के अनुसार निचला सदन कानून निर्माण में प्रमुख है और सीनेट के वीटो को पलट सकता है। फिर भी संविधान संशोधन और राष्ट्रपति द्वारा संवैधानिक न्यायालय के लिए नामित व्यक्तियों की मंजूरी में उच्च सदन की अहम भूमिका है।
एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार बाबिश ने गंभीर हार स्वीकार की और कहा कि एएनओ नुकसान की समीक्षा करेगी। इसके बावजूद उन्होंने सार्वजनिक प्रसारण के वित्तपोषण में बदलाव समेत सरकारी कार्यक्रम जारी रखने का संकल्प जताया। अब सवाल है कि सीनेट में विपक्ष का बहुमत कायम रहते हुए उनका गठबंधन इस एजेंडे को कैसे आगे बढ़ाएगा।
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