शोधकर्ताओं ने डीएनए टाइपराइटर नामक आनुवंशिक रिकॉर्डिंग प्रणाली से चूहे के भ्रूण की 12.8 लाख कोशिकाओं की वंशावली बनाई है। साइंस डेली ने 13 अक्टूबर को इस अध्ययन पर खबर प्रकाशित की। शोध 8 अक्टूबर 2026 को साइंस में आया था। यूडब्ल्यू मेडिसिन के अनुसार, रिकॉर्ड पहली कोशिका के विभाजन से 13.5 दिन तक का है, जब अंग आकार ले चुके होते हैं।
सिएटल के वाशिंगटन विश्वविद्यालय के जे शेंड्योर और डार्टमाउथ कॉलेज के चेंगश्यांग च्यू ने अध्ययन का नेतृत्व किया। स्तनधारी भ्रूण मां के भीतर विकसित होते हैं, इसलिए लंबे समय तक सीधे देखना कठिन है। शोधकर्ताओं के मुताबिक, इसके बजाय विरासत में मिले डीएनए चिह्नों से विकास के बाद कोशिकाओं के संबंध बनाए जाते हैं।
टीम ने चूहे के निषेचित अंडे में नए सिरे से तैयार रिकॉर्डिंग अनुक्रम डाला। डीएनए टाइपराइटर क्रमिक चिह्न जोड़ता है जो अगली पीढ़ियों की कोशिकाओं को मिलते हैं। इन आनुवंशिक रिकॉर्ड से साझा पूर्वज पहचाने जाते हैं। शोध में समय के अनुसार व्यवस्थित वंशवृक्ष है जो कोशिका की पहचान को उसके इतिहास से जोड़ता है; यह भ्रूण की लगातार फिल्म नहीं है।
यूडब्ल्यू मेडिसिन के अनुसार, 100 निषेचित अंडों में रिकॉर्डिंग का प्रयास किया गया और जांच के लिए 10 भ्रूण मिले। विस्तृत विश्लेषण तीसरे भ्रूण पर केंद्रित रहा, जिसमें सबसे समृद्ध सक्रिय रिकॉर्ड था। इसलिए निष्कर्ष एक भ्रूण का विस्तृत पुनर्निर्माण बताते हैं, यह प्रमाण नहीं कि प्रणाली हर चूहे में समान रूप से काम करती है।
टीम के अनुसार, पहली दो कोशिकाओं में से एक से अधिक संतति कोशिकाएं बनीं, लेकिन दोनों ने लगभग समान अनुपात में विविध प्रकार पैदा किए। रक्त और रेटिना की कोशिकाओं ने अपेक्षाकृत जल्दी अपनी पहचान तय की, जबकि त्वचा की बाहरी परत ने बाद में। विश्वविद्यालय के मुताबिक, ये अलग समयक्रम पुराने विकास संबंधी अध्ययनों से मेल खाते हैं।
शोधकर्ता अंगों के निर्माण और जन्मजात विकृतियों या कैंसर में विकास की गड़बड़ी जांचने की संभावना देखते हैं। हॉवर्ड ह्यूजेस मेडिकल इंस्टीट्यूट भी आनुवंशिक रिकॉर्डिंग को सीधे दिखाई न देने वाली प्रक्रियाएं समझने का तरीका बताता है। ये शोध की संभावनाएं हैं: चूहे का प्रयोग मनुष्यों का उपचार स्थापित नहीं करता और न ही नैदानिक लाभ सिद्ध करता है।
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