शोधकर्ताओं ने क्रिस्टल के भीतर दोषों को योजनाबद्ध तरीके से व्यवस्थित करके दो धातु मिश्रधातुओं को मजबूत बनाया है। ओहायो स्टेट विश्वविद्यालय की इस रिपोर्ट को टेक एक्सप्लोर ने 18 अक्टूबर को प्रकाशित किया। साइंस पत्रिका में 15 अक्टूबर को प्रकाशित अध्ययन के अनुसार, मिश्रधातुओं की समग्र रासायनिक संरचना बदले बिना तनाव और ऊँचे तापमान पर धीरे-धीरे होने वाले विरूपण का प्रतिरोध बढ़ा।
टीम में प्रमुख लेखक आंद्रेयास बेट्सोल्ड शामिल हैं, जो अमेरिका के ओहायो स्टेट विश्वविद्यालय में सहायक संबद्ध प्रोफेसर हैं। विश्वविद्यालय के अनुसार, यह तरीका विरूपण के दौरान बनने वाले सूक्ष्म दोषों पर पहले हुए शोध को आगे बढ़ाता है। इसका उद्देश्य मजबूती देने वाली संरचनाओं को सामग्री की डिजाइन का नियोजित हिस्सा बनाना है, जिससे टिकाऊपन बढ़ने की संभावना है।
शोधकर्ताओं ने पहले कोबाल्ट और निकल आधारित एक सुपरअलॉय तथा कोबाल्ट, क्रोमियम और टंगस्टन की एक मिश्रधातु के क्रिस्टल को विरूपित किया। इसके बाद ताप देकर सामग्री का एजिंग उपचार किया गया। विश्वविद्यालय के अनुसार, दो चरणों की प्रक्रिया से परमाणु स्तर पर पतली और सघन संरचनाएँ बनीं। इस प्रकार तरीका सामग्री के समग्र संघटन के बजाय उसकी आंतरिक व्यवस्था बदलता है।
ट्रांसमिशन इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी और कंप्यूटर सिमुलेशन ने बढ़ी हुई मजबूती को दोषों के आसपास परमाणुओं की व्यवस्था से जोड़ा। सहलेखक और ओहायो स्टेट में पदार्थ विज्ञान के प्रोफेसर माइकल मिल्स ने बताया कि उपयुक्त संरचना वाले दोष सामग्री को मजबूत बना सकते हैं। निष्कर्ष योजनाबद्ध आंतरिक संरचनाओं से संबंधित हैं, किसी भी तरह की क्षति के सामान्य लाभ से नहीं।
विश्वविद्यालय ने विमान के टर्बाइन इंजन और बिजलीघरों की मशीनों को संभावित भावी उपयोग बताया, क्योंकि वे ऊँचे तापमान पर काम करती हैं। ये अभी संभावनाएँ हैं: रिपोर्ट मिश्रधातुओं पर शोध का विवरण देती है और व्यावसायिक उपकरणों में उपयोग की घोषणा नहीं करती। बेट्सोल्ड ने आशा जताई कि यह तरीका सामग्री इंजीनियरों के लिए उपलब्ध विकल्पों का विस्तार करेगा।
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