फ्लोरिडा कीज़ में समुद्री गर्मी के दौरान पानी के भीतर लगाई गई अस्थायी छाया ने मस्तिष्क जैसे आकार वाले प्रवाल की दो प्रजातियों को अपना रंग बनाए रखने या फिर से पाने में मदद की। यह निष्कर्ष दो अक्टूबर को फ्रंटियर्स इन मरीन साइंस में प्रस्तुत अध्ययन का है। मैदानी परीक्षण से संकेत मिलता है कि समुद्री लू के समय कुछ चुनिंदा संवेदनशील प्रवाल समूहों की रक्षा की जा सकती है। शोधकर्ताओं ने स्पष्ट किया कि इतने छोटे उपाय से पूरे प्रवाल भित्ति क्षेत्र को नहीं बचाया जा सकता और समुद्र का तापमान बढ़ने का खतरा भी समाप्त नहीं होता।
नोवा साउथईस्टर्न यूनिवर्सिटी की करेन नीली के नेतृत्व वाले दल ने 2023 में फ्लोरिडा में गंभीर प्रवाल विरंजन के बाद न्यूफाउंड हार्बर में छाया का परीक्षण किया। प्रवाल अपने भोजन के बड़े हिस्से के लिए सूक्ष्म शैवालों पर निर्भर रहते हैं। लंबे समय तक गर्म पानी और तेज धूप इस संबंध को बिगाड़ सकते हैं, जिससे प्रवाल फीके पड़ जाते हैं। दल यह जानना चाहता था कि पानी गर्म रहने पर भी रोशनी घटाने से तनाव कम होगा या नहीं।
वर्ष 2024 की गर्मियों में शोधकर्ताओं ने स्यूडोडिप्लोरिया क्लिवोसा और कोलपोफिलिया नाटांस नामक प्रजातियों के समूहों पर कपड़े वाले बीस अस्थायी छायादार ढांचे लगाए। तुलना के लिए पास के बीस प्रवाल बिना छाया के रखे गए। ढांचे प्रवालों से लगभग तीस सेंटीमीटर ऊपर तैरते थे। अध्ययन तथा वैज्ञानिक पत्रिका ईओस के अनुसार, अगस्त से नवंबर तक दल ने प्रवालों के रंग पर नजर रखी और उनसे जुड़े शैवालों के नमूने लिए।
छाया में रखे प्रवालों का रंग और फीका होना रुक गया और कुछ का रंग लौट आया, जबकि तुलना वाले प्रवाल अधिक फीके पड़े। अध्ययन के अनुसार, 2024 में उस स्थान पर अब तक का दूसरा सबसे अधिक संचयी तापीय दबाव दर्ज हुआ। फिर भी इस परीक्षण में विरंजन मध्यम स्तर का था और किसी भी समूह में प्रवालों की मृत्यु नहीं हुई। जुड़े हुए शैवालों की मात्रा या प्रकार में भी स्पष्ट अंतर नहीं मिला। इसलिए रंग में सुधार अपने आप में लंबे समय तक सुरक्षा का प्रमाण नहीं है।
लेखकों के अनुसार चुनिंदा, अधिक महत्वपूर्ण प्रवालों को गर्मी की लहर के दौरान बचाने के लिए ऐसी छाया अपेक्षाकृत कम खर्च वाला साधन हो सकती है। नीली ने कहा कि इसका सीमित पैमाना सबसे बड़ी बाधा है। ढांचे हटाने के बाद प्रवालों के जीवित रहने, रोगों और प्रजनन पर आगे अध्ययन आवश्यक होगा। यह शोध भित्तियों के संरक्षण के लिए स्थानीय और अस्थायी मदद की संभावना दिखाता है, जबकि महासागरों का लगातार गर्म होना व्यापक खतरा बना हुआ है।
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