9 मई को ScienceDaily के माध्यम से प्रकाशित एक महत्वपूर्ण अध्ययन ने खुलासा किया है कि अंटार्कटिक बर्फ की चादरों के निचले हिस्से में गहरी छिपी हुई सुरंगें गर्म समुद्री जल को फंसाती हैं और बर्फ के पिघलने की दर को नाटकीय रूप से बढ़ाती हैं। यह शोध पूर्वी अंटार्कटिका में फिम्बुलिसेन आइस शेल्फ पर केंद्रित था और यह दर्शाता है कि बर्फ की चादर के निचले हिस्से की आकृति समुद्री जल के प्रवाह को निर्धारित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
वैज्ञानिकों ने पाया कि इन उप-हिमनद सुरंगों के भीतर, पिघलने की दरें आसपास के क्षेत्रों की तुलना में लगभग दस गुना तक बढ़ सकती हैं। ये सुरंगें कीप की तरह काम करती हैं — अपेक्षाकृत गर्म अटलांटिक जल को आकर्षित करती हैं और उसे बर्फ के आधार के साथ लंबे समय तक संपर्क में रखती हैं। यह निरंतर संपर्क बुनियादी पिघलाव को इस हद तक बढ़ा देता है जिसे मौजूदा जलवायु मॉडल पकड़ नहीं पाते।
सबसे चिंताजनक खोज शायद यह है कि पूर्वी अंटार्कटिका — जिसे लंबे समय से अपने पश्चिमी समकक्ष की तुलना में स्थिर और कम कमजोर माना जाता था — पहले की अपेक्षा कहीं अधिक असुरक्षित हो सकता है। यदि ये छिपी हुई पिघलान प्रक्रियाएं पूर्वी अंटार्कटिक बर्फ की चादरों में व्यापक रूप से हो रही हैं, तो वैश्विक समुद्र स्तर वृद्धि के परिणाम गंभीर और अनुमान से बहुत पहले सामने आ सकते हैं।
यह अध्ययन वर्तमान जलवायु अनुमानों में एक महत्वपूर्ण कमी को उजागर करता है। अधिकांश वैश्विक मॉडल बर्फ की चादर के निचले भाग की जटिल ज्यामिति या उसके नीचे समुद्री परिसंचरण पर सुरंग प्रभाव को ध्यान में नहीं लेते। इस चूक को ठीक करने से अंटार्कटिक बर्फ के भविष्य के समुद्र स्तर वृद्धि में योगदान के अनुमान काफी बढ़ सकते हैं।
इंपीरियल कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं ने एक संबंधित उपलब्धि में अंटार्कटिक बर्फ में रिकॉर्ड-तोड़ ड्रिलिंग हासिल की। उनका काम लाखों वर्ष पुराने जलवायु डेटा को उजागर करने का लक्ष्य रखता है, जो पृथ्वी के तापमान और वायुमंडलीय परिस्थितियों की गहरी समयरेखा प्रदान करेगा।
जीव विज्ञान के क्षेत्र में भी इस सप्ताह अच्छी खबर आई। शोधकर्ताओं ने एक्सोलोटल, ज़ेब्राफिश और चूहों में साझा जीन की पहचान की जो अंग पुनर्जनन के दौरान सक्रिय होते हैं। ये आनुवंशिक मार्ग, यदि बेहतर समझे जाएं, तो एक दिन मनुष्यों को क्षतिग्रस्त ऊतकों या खोए हुए अंगों को पुनः विकसित करने में सहायक चिकित्सा का मार्ग खोल सकते हैं।
इसके अतिरिक्त, एक अलग अध्ययन में पाया गया कि युवा जानवरों के आंत माइक्रोबायोम के प्रत्यारोपण से वृद्ध विषयों में उम्र-संबंधित यकृत क्षति को काफी हद तक कम किया जा सकता है। ये निष्कर्ष बताते हैं कि हमारी आंतों में रहने वाले सूक्ष्मजीव प्रणालीगत उम्र बढ़ने में पहले की तुलना में अधिक सक्रिय भूमिका निभाते हैं।
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