फ्रांस में शनिवार, 17 अक्टूबर को लाखों लोगों ने बढ़ती महंगाई और स्कूलों की खराब परिस्थितियों के खिलाफ प्रदर्शन किया। कुछ सभाओं के साथ झड़पें, आगजनी और लूटपाट भी हुई। एपी और टीएफ1 के अनुसार गृह मंत्री लॉरां नुनेज़ ने शाम के प्रारंभिक आकलन में देशभर में करीब 400 लोगों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी दी।
नुनेज़ ने 110 जुलूसों में 5.5 लाख लोगों की भागीदारी का अनुमान दिया, जबकि आयोजकों ने संख्या 8 लाख बताई। टीएफ1 ने दोनों अलग-अलग आंकड़े प्रकाशित किए और बताया कि एक अनुमान मंत्री का था, जबकि दूसरा आयोजन करने वाले समूहों का। ये एक ही आंदोलन के अलग अनुमान हैं, कोई सहमति वाला आंकड़ा नहीं। दिनभर हुई घटनाओं के बारे में अधिकारियों के जानकारी जुटाने और उनका आकलन करने के दौरान हिरासत की संख्या भी अस्थायी रही।
प्रदर्शनों में स्कूली और विश्वविद्यालय के छात्र, श्रमिक संगठनों के सदस्य, येलो वेस्ट समर्थक और वामपंथी दल शामिल हुए। रॉयटर्स के अनुसार आह्वान सोशल मीडिया से शुरू हुआ और उसे छात्र संगठनों का समर्थन मिला, जो सितंबर के मध्य से बेहतर शिक्षण परिस्थितियों की मांग कर रहे हैं। बढ़ती कीमतों और शिक्षा संसाधनों की कमी ने इन समूहों को जोड़ा।
रॉयटर्स ने पेरिस में, खासकर प्लास द ला रेपुब्लिक के आसपास, भारी नुकसान, ल्यों के पर्यटन कार्यालय में आग और मार्सेई तथा लील के नगर भवनों में क्षति की खबर दी। एजेंसी ने यह भी बताया कि पेरिस समेत अधिकांश जुलूस बिना घटनाओं के निकले। इसलिए शांतिपूर्ण जुलूस और हिंसक घटनाएं दिन के अलग पहलू रहे।
एपी के अनुसार नुनेज़ ने पुलिस से टकराव और सार्वजनिक इमारतों पर हमलों के लिए कट्टर अति-वामपंथी समूहों को जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि दुकानों में लूटपाट करने के इच्छुक लोग भी उनसे जुड़ गए। हिंसा में शामिल लोगों का यह वर्णन मंत्री का आकलन था। उनके अनुसार हिरासत में लिए गए अधिकांश लोग वयस्क थे।
एपी ने बताया कि शनिवार शाम मध्य पेरिस में घटनाएं जारी थीं, इसलिए अशांति का अंतिम दायरा स्पष्ट नहीं था। हिरासत की प्रारंभिक संख्या और भागीदारी के अलग अनुमान शाम की रिपोर्टों की स्थिति बताते हैं। उस कवरेज में देशभर का अंतिम आकलन अभी उपलब्ध नहीं था।
टिप्पणियाँ