अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी को 2025 और 2026 के अमेरिकी और इसराइली हमलों में क्षतिग्रस्त ईरानी परमाणु प्रतिष्ठानों के पुनर्निर्माण के प्रयास नहीं दिखे हैं। एजेंसी प्रमुख राफेल ग्रोसी ने 27 अक्टूबर को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में यह जानकारी दी। एपी ने 28 अक्टूबर को इस आकलन की खबर दी। ग्रोसी ने कहा कि वास्तविक स्थिति जानने के लिए प्रतिष्ठानों के भीतर निरीक्षण जरूरी है और दूर से निगरानी उसका विकल्प नहीं हो सकती।
संयुक्त राष्ट्र समाचार और अरब न्यूज के अनुसार, एजेंसी अब भी सत्यापित नहीं कर सकती कि निगरानी के दायरे में आने वाली ईरानी परमाणु सामग्री का अन्य उपयोग के लिए विचलन नहीं हुआ है। ग्रोसी ने पहले घोषित लगभग 440 किलोग्राम अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम का उल्लेख किया। यह सत्यापन में कमी है, सामग्री के विचलन का निष्कर्ष नहीं। एपी के अनुसार ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को शांतिपूर्ण बताता है।
ग्रोसी ने कहा कि जून 2025 में हमले शुरू होने के बाद निरीक्षक सुरक्षा कारणों से ईरान छोड़ गए थे। वे महीनों से लौटने को तैयार हैं, लेकिन तेहरान ने प्रभावित और अप्रभावित प्रतिष्ठानों में सामग्री के सत्यापन के लिए जरूरी जानकारी और प्रवेश नहीं दिया है। संयुक्त राष्ट्र समाचार के अनुसार, एजेंसी इस्फहान ईंधन संवर्धन संयंत्र में भी प्रवेश चाहती है, जिसकी घोषणा जून 2025 के हमलों से ठीक पहले हुई थी।
बुशहर इसका अपवाद है, जहां निरीक्षक परमाणु बिजलीघर में सत्यापन कर रहे हैं, ग्रोसी ने बताया। ईरानी परमाणु एजेंसी ने इस्तेमाल किए गए ईंधन की जांच के उपकरण उपलब्ध कराने में सहयोग किया है। इस ईंधन को अगले वर्ष की शुरुआत में सूखे भंडारण में भेजने की अपेक्षा है। संयुक्त राष्ट्र के विवरण के अनुसार, इस सीमित सहयोग से अन्य स्थानों पर सामान्य निरीक्षण बहाल नहीं हुए हैं।
ब्रिटेन की संयुक्त राष्ट्र राजदूत सारा मैकिन्टॉश ने ईरान से सभी परमाणु स्थलों पर निरीक्षकों को आने देने का आग्रह किया और विश्वास बहाली के लिए सत्यापन को जरूरी बताया। उनके प्रकाशित बयान में कूटनीतिक समाधान का समर्थन दोहराया गया। ग्रोसी ने भी आईएईए सत्यापन पर आधारित कूटनीति और लंबित सवालों को बिना देरी सुलझाने का आग्रह किया। उनके आकलन में यूरेनियम भंडार की स्थिति और व्यापक निरीक्षण व्यवस्थाएं अब भी अनसुलझी हैं।
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