होम पर वापस जाएं आईएमएफ की चेतावनी: युद्ध और कर्ज वैश्विक अर्थव्यवस्था की मजबूती की परीक्षा ले रहे हैं व्यापार

आईएमएफ की चेतावनी: युद्ध और कर्ज वैश्विक अर्थव्यवस्था की मजबूती की परीक्षा ले रहे हैं

प्रकाशित 18 अक्टूबर 2026 1 दृश्य

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की संचालन समिति ने 17 अक्टूबर को बैंकॉक में चेतावनी दी कि युद्ध, कर्ज और व्यापार में व्यवधान वैश्विक अर्थव्यवस्था की मजबूती की परीक्षा ले रहे हैं। आईएमएफ और रॉयटर्स के अनुसार, समिति के अध्यक्ष तथा सऊदी वित्त मंत्री मोहम्मद अल-जदान ने सरकारों से कमजोर लोगों और विकास बढ़ाने वाले निवेश की रक्षा करते हुए वित्तीय गुंजाइश बहाल करने को कहा।

यह चेतावनी आईएमएफ और विश्व बैंक की वार्षिक बैठकों के समापन पर आई। अल-जदान ने कहा कि संघर्ष मानवीय नुकसान के साथ आर्थिक लागत भी बढ़ा रहे हैं, जबकि महत्वपूर्ण जलमार्गों और व्यापारिक रास्तों में बाधाएं ऊर्जा तथा खाद्य सुरक्षा को खतरे में डालती हैं। उन्होंने अर्थव्यवस्था की झटके सहने की क्षमता को निश्चित मानने के बजाय विश्वसनीय मध्यम अवधि की बजट योजनाओं पर जोर दिया।

आईएमएफ की ब्रीफिंग के अनुसार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता उत्पादकता बढ़ा सकती है, लेकिन आर्थिक असमानता भी गहरी कर सकती है, खासकर कम आय वाले देशों और नाजुक राज्यों में। प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने कहा कि बैठकों में आर्थिक मजबूती और एशिया की सक्रियता को लेकर आशा के साथ महंगाई, कर्ज और जलवायु जोखिमों की चिंता भी थी। एआई निवेश की तेजी पर अधिक निर्भरता स्वयं एक कमजोरी है।

17 अक्टूबर के एक अलग बयान में यूरोपीय केंद्रीय बैंक की अध्यक्ष क्रिस्टीन लगार्ड ने कहा कि व्यापारिक तनाव और संरक्षणवाद विश्वास कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने सितंबर के पूर्वानुमान बताए: यूरो क्षेत्र की वृद्धि 2026 में 0.9%, 2027 में 1.4% और 2028 में 1.5% रहेगी। बयान के अनुसार सितंबर में कुल मुद्रास्फीति मुख्यतः ऊर्जा के कारण 3.8% रही, जबकि मूल मुद्रास्फीति थोड़ी बढ़कर 2.5% हुई।

बैठक में राजनीतिक मतभेद भी दिखे। रॉयटर्स ने बुंडेसबैंक के अध्यक्ष योआखिम नागेल के हवाले से बताया कि रूसी वित्त मंत्री अंतोन सिलुआनोव के भाषण के दौरान लगभग आधे प्रतिनिधि बाहर चले गए। फिर भी अल-जदान ने कहा कि सभी सदस्यों ने अध्यक्ष के बयान का समर्थन किया। उन्होंने युद्ध और महंगी ऊर्जा के कारण अल्पकालिक वित्तीय दबाव झेल रहे देशों को अधिक सहायता देने को भी कहा।

अधिकारियों की प्राथमिकताओं में केंद्रीय बैंकों की स्वतंत्रता, मजबूत राजकोषीय भंडार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग शामिल थे। रॉयटर्स के अनुसार अल-जदान ने निजी क्षेत्र की वृद्धि और निवेश के अनुकूल परिस्थितियों का समर्थन किया। जॉर्जीवा ने सरकारों, एआई कंपनियों और अन्य पक्षों से सहयोग मांगा, ताकि तकनीक का लाभ मिल सके और लोगों, व्यवसायों तथा अर्थव्यवस्थाओं के जोखिमों का प्रबंधन हो।

स्रोत: IMF: https://mediacenter.imf.org/news/imf-imfc-press-briefing/s/6c812df6-f0e8-4a3b-b663-22c9e888b440 ; Reuters via MarketScreener: https://uk.marketscreener.com/news/delegates-walked-out-of-imf-steering-committee-meeting-when-russian-official-spoke-sources-say-ce785cdade8df420 ; ECB: https://www.ecb.europa.eu/press/key/date/2026/html/ecb.sp261017~7015ea3099.fr.html

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