ओरेगन स्टेट विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने प्रकाश से सक्रिय होने वाली सामग्री बनाई है, जो अतिरिक्त धातु सह-उत्प्रेरक के बिना हाइड्रोजन पैदा करती है। विश्वविद्यालय की २८ सितंबर की घोषणा के बाद साइंसडेली ने ४ अक्टूबर को इसकी खबर दी। नतीजे सौर ईंधन का संभावित रास्ता हैं, प्रमाणित औद्योगिक प्रक्रिया नहीं।
कोरवैलिस में किरियाकोस स्टिलियानू के नेतृत्व वाली टीम ने धातु आयनों और कार्बनिक अणुओं से बने धातु-कार्बनिक ढाँचों का अध्ययन किया। शोधपत्र १४ सितंबर को जर्नल ऑफ द अमेरिकन केमिकल सोसाइटी में ऑनलाइन प्रकाशित हुआ। इन सामग्रियों में रासायनिक घटक बदलकर उनके प्रभाव जाँचे जा सकते हैं।
शोधपत्र के अनुसार, जाँची गई सामग्रियों में बीवीआर-१९ परिवार के जस्ता संस्करण ने सबसे अच्छा प्रदर्शन किया। प्रकाश इसके सिस्टीन के द्विलक घटकों में सल्फर–सल्फर बंध अस्थायी रूप से तोड़ता है। इससे बने सक्रिय रासायनिक रूप विद्युत आवेश अलग करने और बिना अलग सह-उत्प्रेरक हाइड्रोजन बनाने में मदद करते हैं।
विश्वविद्यालय के अनुसार, सामग्री कमरे के तापमान पर जलीय घोल में स्वतः बनती है, जिससे तैयारी की ऊर्जा घट सकती है। स्टिलियानू ने बताया कि कार्बनिक घटक प्रकाश पकड़कर इलेक्ट्रॉन स्थानांतरित करते हैं। धातु बदलने से कुछ संस्करणों के बेहतर प्रदर्शन की वजह समझ आई, जो अगले उत्प्रेरकों के डिजाइन में सहायक है।
हाइड्रोजन का उपयोग ईंधन कोशिकाओं, अमोनिया उत्पादन और धातु शोधन में होता है। विश्वविद्यालय प्राकृतिक गैस से इसके पारंपरिक उत्पादन को कार्बन डाइऑक्साइड का स्रोत बताता है। शोध स्वच्छ विकल्पों में मदद कर सकता है, लेकिन प्रयोगशाला के ये नतीजे व्यावसायिक रूप से प्रतिस्पर्धी लागत साबित नहीं करते।
पत्रिका ने बताया कि विश्वविद्यालय ने बीवीआर-१९ के संश्लेषण, संबंधित सामग्रियों और प्रकाश-उत्प्रेरक प्रक्रिया के पेटेंट का आवेदन किया है। नतीजे आगे के शोध के लिए आणविक डिजाइन की रणनीति देते हैं। इस तरीके से व्यावहारिक और किफायती सौर ईंधन मिल सकेगा या नहीं, यह अभी साबित होना बाकी है।
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