फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने 22 अक्टूबर को कहा कि जिन समूहों को वह वैधता से रहित मानते हैं, उनके प्रदर्शन जहां संभव हो प्रतिबंधित होंगे। यह घोषणा 24 अक्टूबर की रैलियों से पहले हुई। रॉयटर्स के अनुसार, पेरिस में सुरक्षा बैठक के बाद यूनियन जुलूसों को दुकानों की रक्षा के लिए बदले मार्गों पर अनुमति देने की बात कही गई।
यह फैसला 17 अक्टूबर के देशव्यापी प्रदर्शनों के साथ हुई हिंसा और लूटपाट के बाद आया। रॉयटर्स ने असंतोष को महंगी ऊर्जा, घरेलू बजट पर दबाव और सार्वजनिक सेवाओं की चिंता से जोड़ा। मैक्रों ने कुछ उपद्रव के लिए संगठित अति वामपंथी समूहों को जिम्मेदार बताया; यह राष्ट्रपति का आरोप है।
संसदीय प्रसारक एलसीपी के अनुसार, प्रीफेक्ट मौजूदा कानून के तहत यूनियनों के आवेदन जांचेंगे और दुकानों तथा सार्वजनिक भवनों की सुरक्षा वाले मार्ग सुझाएंगे। टीएफ1 के मुताबिक पुलिस ने खास तौर पर सीजीटी की पहल पर पेरिस में बास्तील से नासियों तक मार्च मंजूर किया है। इसलिए नीति हर प्रदर्शन पर रोक नहीं लगाती।
एलसीपी के मुताबिक सरकारी प्रवक्ता मॉद ब्रेजों ने कहा कि पाबंदियां हर मामले में अलग तय होंगी और प्रशासनिक अदालतों में चुनौती दी जा सकेगी। ला फ्रांस इंसूमीज के सांसदों ने इसे स्वतंत्रताओं पर हमला बताया। वित्त समिति के अध्यक्ष एरिक कोकरेल ने इससे अधिक अव्यवस्था पैदा होने की चेतावनी दी।
पेरिस नगर प्रशासन ने नुकसान पहुंचाने में इस्तेमाल हो सकने वाली वस्तुएं हटाने की बात कही। उसने निवासियों और दुकानदारों से शनिवार दोपहर से कूड़ेदान, साइकिल और बाहरी फर्नीचर अंदर रखने को कहा। योजना में नगर पुलिस और मध्यस्थ दलों के साथ सप्ताहांत में एक हजार से अधिक सफाई कर्मचारी शामिल हैं।
नगर प्रशासन का संकट प्रकोष्ठ 24 अक्टूबर दोपहर को पुलिस प्रीफेक्चर के साथ सेवाओं का समन्वय शुरू करेगा। रॉयटर्स के अनुसार मैक्रों ने शुक्रवार को रक्षा परिषद की बैठक की योजना बनाई थी। अगला कदम सुरक्षा तैयारियों और प्रस्तावित सभाओं पर फैसलों का है, जबकि प्रदर्शन के अधिकार पर विवाद जारी है।
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