होम पर वापस जाएं बहुभाषी लोगों में कम अनुमानित उम्र वाली मस्तिष्क गतिविधि दिखी स्वास्थ्य

बहुभाषी लोगों में कम अनुमानित उम्र वाली मस्तिष्क गतिविधि दिखी

प्रकाशित 23 अगस्त 2026 0 दृश्य

कई भाषाएं बोलने वाले लोगों में मस्तिष्क गतिविधि के ऐसे ढांचे दिखे जो अपेक्षाकृत कम अनुमानित मस्तिष्क आयु से जुड़े थे। यूरोपीय तंत्रिका विज्ञान सोसायटियों के महासंघ ने 22 अगस्त को बताया कि यह शोध एफईएनएस फोरम 2026 में प्रस्तुत किया गया। विश्लेषण में एक भाषा बोलने वालों की तुलना में द्विभाषी प्रतिभागियों का मस्तिष्क लगभग छह वर्ष, तीन भाषाएं बोलने वालों का लगभग सात वर्ष और चार भाषाएं बोलने वालों का लगभग 13 वर्ष कम उम्र का दिखाई दिया।

बास्क सेंटर ऑन कॉग्निशन, ब्रेन एंड लैंग्वेज की लुसिया अमोरुसो ने स्पेन, चिली, अर्जेंटीना और आयरलैंड के शोधकर्ताओं के साथ इस काम का नेतृत्व किया। टीम ने पहले 728 लोगों के मैग्नेटोएन्सेफेलोग्राफी आंकड़ों से कृत्रिम बुद्धिमत्ता मॉडल को प्रशिक्षित किया। मॉडल ने सीखा कि मस्तिष्क कोशिकाओं के बीच संचार के ढांचे सामान्यतः उम्र के साथ कैसे बदलते हैं। इसके बाद इस मस्तिष्क-वृद्धावस्था घड़ी को स्पेन के बास्क क्षेत्र के 144 लोगों के एक अलग समूह पर लागू किया गया।

दूसरे समूह के प्रतिभागी स्पेनिश, बास्क, फ्रेंच और अंग्रेजी में से एक से चार भाषाएं बोलते थे। वास्तविक आयु और मॉडल के अनुमान की तुलना में क्रमिक संबंध दिखा। अधिक भाषाएं बोलना, उनमें बेहतर दक्षता और दूसरी भाषा को कम उम्र में सीखना, तीनों कम उम्र जैसी दिखने वाली गतिविधि से जुड़े थे। शोधकर्ताओं के अनुसार विश्लेषण में आयु, लिंग और शिक्षा को ध्यान में रखा गया।

ये नतीजे साबित नहीं करते कि बहुभाषिकता ने ये अंतर पैदा किए या दूसरी भाषा सीखने से डिमेंशिया को रोका जा सकता है। अध्ययन वैज्ञानिक सम्मेलन में प्रस्तुत हुआ है और जारी सारांश इस खास मस्तिष्क-चित्रण विश्लेषण के लिए सहकर्मी-समीक्षित प्रकाशन का विवरण नहीं देता। शोधकर्ताओं ने यह भी माना कि जीवनशैली, सामाजिक भागीदारी और मापे नहीं गए अन्य कारक इस संबंध की व्याख्या में योगदान कर सकते हैं।

नया काम अमोरुसो और सहयोगियों के एक अलग सहकर्मी-समीक्षित विश्लेषण के बाद आया है, जिसे 2025 में Nature Aging ने प्रकाशित किया था और जिसमें 27 यूरोपीय देशों के 86,149 लोग शामिल थे। उस जनसंख्या अध्ययन ने कई शारीरिक, सामाजिक और राजनीतिक कारकों के समायोजन के बाद बहुभाषी वातावरण को तेज जैव-व्यवहारिक वृद्धावस्था की कम संभावना से जोड़ा था। हालांकि उसमें अलग आंकड़े थे, इसलिए वह नए मस्तिष्क अनुमान की स्वतंत्र पुष्टि नहीं है।

टीम अब जांचना चाहती है कि क्या अल्जाइमर रोग जैसी तंत्रिका-अपक्षयी स्थितियों वाले लोगों में भी ऐसे ढांचे मिलते हैं और क्या बहुत मिलती-जुलती भाषाओं के बीच बदलने से संज्ञानात्मक नियंत्रण पर विशेष मांग पड़ती है। दीर्घकालिक और हस्तक्षेप आधारित अध्ययन उपलब्ध होने तक ये निष्कर्ष बहुभाषी अनुभव तथा मस्तिष्क की सहनशीलता पर आगे शोध का आधार देते हैं, न कि कोई चिकित्सकीय सलाह या निश्चित स्वास्थ्य लाभ।

स्रोत: Federation of European Neuroscience Societies, ScienceDaily, Nature Aging

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