दक्षिण अफ्रीकी विधिवेत्ता नवनाथेम (नवी) पिल्लै ने शुक्रवार, 9 अक्टूबर को 2026 का नोबेल शांति पुरस्कार जीता। नॉर्वे की नोबेल समिति ने ओस्लो में यह घोषणा की। समिति ने शांति और अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए उनके काम को सम्मानित किया और युद्ध अपराधों, मानवता के विरुद्ध अपराधों तथा जनसंहार के अभियोजन में उनके योगदान पर जोर दिया।
रंगभेद के दौर में डरबन में जन्मीं पिल्लै ने भेदभाव का विरोध करते हुए और नस्ली अलगाव के विरोधियों का बचाव करते हुए अपना कानूनी करियर बनाया। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, उन्होंने 1967 में नटाल में वकालत का कार्यालय खोला और 1995 में दक्षिण अफ्रीका के उच्च न्यायालय में नियुक्त पहली अश्वेत महिला बनीं। उनके काम में राजनीतिक कैदियों के अधिकारों की रक्षा शामिल थी।
संयुक्त राष्ट्र ने बताया कि पिल्लै 1995 में रवांडा के लिए अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायाधिकरण से जुड़ीं और आठ वर्ष वहां रहीं, जिनमें चार वर्ष अध्यक्ष के रूप में थे। वर्ष 1998 के एक ऐतिहासिक फैसले ने स्थापित किया कि किसी संरक्षित समूह को नष्ट करने के इरादे से किए गए बलात्कार और यौन हिंसा जनसंहार हो सकते हैं। बाद में वह 2003 से 2008 तक अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय में रहीं।
संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, पिल्लै 2008 से 2014 तक मानवाधिकार उच्चायुक्त रहीं और 2021 से 2025 तक कब्जे वाले फलस्तीनी क्षेत्र तथा इजराइल संबंधी जांच की अध्यक्ष रहीं। रॉयटर्स ने बताया कि आयोग ने निष्कर्ष निकाला था कि इजराइल ने गाजा में जनसंहार किया, जिसे इजराइल ने खारिज किया। यह जांच आयोग का निष्कर्ष है और किसी अदालत के फैसले से अलग है।
रॉयटर्स के अनुसार, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख फोल्कर तुर्क ने शुक्रवार को पुरस्कार का स्वागत मानवाधिकारों और न्याय चाहने वालों की साझा जीत के रूप में किया। उन्होंने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय आपराधिक जवाबदेही और अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय का महत्व रेखांकित करता है। तुर्क के अनुसार, सम्मान फलस्तीन से आगे अनेक संघर्षों में पिल्लै के काम को मान्यता देता है।
रॉयटर्स के अनुसार, पुरस्कार की राशि 1.2 करोड़ स्वीडिश क्रोनर, लगभग 12 लाख डॉलर है और इसे 10 दिसंबर को ओस्लो में देने की योजना है। समारोह अल्फ्रेड नोबेल की पुण्यतिथि पर होगा, जिन्होंने 1895 की अपनी वसीयत से पुरस्कार स्थापित किए थे। वेनेजुएला की विपक्षी नेता मारिया कोरीना मचाडो को 2025 का शांति पुरस्कार मिला था।
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