सर्वेक्षण में शामिल लगभग आधी महिला फुटबॉलर समय से पहले खेल छोड़ने पर विचार कर रही हैं। वैश्विक खिलाड़ी संघ फिफप्रो ने 12 अक्टूबर को प्रकाशित निष्कर्षों में यह जानकारी दी। दुनिया भर की लगभग 800 खिलाड़ियों के सर्वेक्षण और साक्षात्कार पर आधारित अध्ययन में आर्थिक दबाव और मानसिक तनाव प्रमुख चिंताएं हैं।
रिपोर्ट के अनुसार 49 प्रतिशत प्रतिभागी जल्दी खेल छोड़ने पर विचार कर रही हैं। इस समूह में 59 प्रतिशत ने आर्थिक कारण और 46 प्रतिशत ने मानसिक तनाव बताया। ये आंकड़े सर्वेक्षण में शामिल खिलाड़ियों की मंशा बताते हैं, पहले ही हो चुके संन्यास की संख्या नहीं।
फिफप्रो के अनुसार महंगाई के हिसाब से समायोजित क्लब का औसत मासिक वेतन 2017 के अध्ययन के बाद तीन गुना होकर 2,601 डॉलर हो गया है। हालांकि माध्यिका 1,669 डॉलर है, जिससे बढ़ोतरी की असमानता दिखती है। संघ ने अधिक संसाधन वाली प्रतियोगिताओं की वृद्धि और अन्य जगहों की परिस्थितियों में बड़ा अंतर बताया।
संघ के अनुसार 57 प्रतिशत प्रतिभागियों ने मानसिक स्वास्थ्य संबंधी कठिनाइयों का सामना किया; इस समूह की आधी खिलाड़ियों को क्लब से सहायता नहीं मिली। रिपोर्ट की अलग व्याख्या में फिफप्रो की महिला फुटबॉल निदेशक एलेक्स कल्विन ने कहा कि खिलाड़ियों ने पर्याप्त सुरक्षा के बिना अतिरिक्त कार्यभार और सोशल मीडिया पर दुर्व्यवहार का उल्लेख किया।
कल्विन ने कहा कि संसाधनों से आजीविका के साथ सुरक्षित और स्थिर कार्यस्थल भी सुनिश्चित होने चाहिए। उन्होंने कहा कि खिलाड़ियों के स्वास्थ्य की रक्षा से प्रदर्शन और पूरे खेल को लाभ मिलता है। इसलिए रिपोर्ट की चिंताएं वेतन के अलावा प्रशिक्षण और प्रतिस्पर्धा की परिस्थितियों तक जाती हैं।
फिफप्रो वेतन, सुविधाओं, कर्मचारियों और स्वास्थ्य से जुड़े लागू किए जा सकने वाले न्यूनतम रोजगार मानकों की मांग कर रहा है। वह खेल प्रदर्शन के लक्ष्यों से स्वतंत्र अनिवार्य मानसिक स्वास्थ्य सहायता भी चाहता है। करियर को अधिक टिकाऊ बनाने के ये संघ के प्रस्ताव हैं, हाल में अपनाए गए नियम नहीं।
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