प्रीमियर लीग ने मंगलवार को कहा कि एक स्वतंत्र आयोग ने मैनचेस्टर सिटी को नौ सत्रों में गंभीर वित्तीय नियम उल्लंघनों का दोषी पाया है। लीग के अनुसार, क्लब ने जांच में पूरा सहयोग भी नहीं किया। सिटी ने किसी गलत काम से इनकार किया और अपील करने की बात कही है। अभी कोई दंड तय नहीं हुआ है; उस पर अलग सुनवाई होगी।
ये निष्कर्ष 2009-10 से 2017-18 तक के सत्रों से जुड़े हैं, जब सिटी इंग्लैंड की प्रमुख फुटबॉल टीमों में शामिल हुआ। प्रीमियर लीग ने दिसंबर 2018 में जांच शुरू की और फरवरी 2023 में औपचारिक शिकायत दर्ज की। लीग के विवरण के अनुसार, आयोग की 42 दिन चली सुनवाई दिसंबर 2024 में समाप्त हुई थी।
प्रीमियर लीग के मुताबिक, आयोग ने पाया कि सिटी ने कई प्रायोजकों के साथ ऐसे व्यावसायिक समझौते किए जो वास्तविक व्यवस्थाओं को नहीं दर्शाते थे। लीग ने कहा कि उस समय क्लब की मालिक अबू धाबी यूनाइटेड ग्रुप ने प्रायोजन भुगतान के कुछ हिस्सों और अन्य खर्चों के लिए धन दिया। उसके अनुसार, इन व्यवस्थाओं से दर्ज आय बढ़ी और दर्ज खर्च नौ सत्रों में 90 करोड़ पाउंड से अधिक घटे।
लीग ने कहा कि आयोग ने सिटी के खातों को गलत पाया, साथ ही निष्कर्ष निकाला कि क्लब ने लेखा परीक्षकों और फुटबॉल नियामकों से अपनी वास्तविक वित्तीय स्थिति छिपाई तथा प्रीमियर लीग और यूईएफए की खर्च सीमाएं काफी हद तक पार कीं। जांच में सहयोग न करने के चार आरोपों में से तीन सही पाए गए। इन निष्कर्षों पर अपील की जा सकती है।
मैनचेस्टर सिटी ने निर्णय पर आश्चर्य और निराशा जताई, खुद को निर्दोष बताया और कहा कि आयोग की राय में कानून, सिद्धांत और तथ्यों से जुड़ी महत्वपूर्ण गलतियां हैं। क्लब उपलब्ध अपील प्रक्रियाओं का उपयोग करेगा। प्रीमियर लीग के मुख्य कार्यकारी रिचर्ड मास्टर्स ने इस मामले को प्रतियोगिता के इतिहास का सबसे महत्वपूर्ण अनुशासनात्मक निर्णय बताया और क्लबों तथा प्रशंसकों के लिए निष्पक्ष नियमों पर जोर दिया।
लीग के अनुसार, आयोग एक और गोपनीय सुनवाई में दंड पर विचार करेगा। सिटी के पास निष्कर्षों के खिलाफ अपील करने के लिए शुक्रवार, 2 अक्टूबर तक का समय है। इन प्रक्रियाओं के पूरा होने तक किसी संभावित दंड का स्वरूप और समय तय नहीं है; क्लब और प्रतियोगिता पर उसके असर को लेकर भी अनिश्चितता बनी हुई है।
टिप्पणियाँ