अंतरिक्ष में 90 दिन से अधिक समय बिताने वाले अंतरिक्ष यात्रियों में पृथ्वी पर लौटने के बाद कूल्हे की हड्डी टूटने की दर छोटी उड़ानों पर गए यात्रियों की तुलना में अधिक पाई गई। यह निष्कर्ष एक अक्टूबर को मेयो क्लिनिक प्रोसीडिंग्स में प्रकाशित अध्ययन का है। नासा के जॉनसन अंतरिक्ष केंद्र के शोधकर्ताओं ने अमेरिकी अंतरिक्ष यात्रियों के फ्रैक्चर रिकॉर्ड देखे। यह एक सांख्यिकीय संबंध है और यात्रियों की छोटी संख्या के कारण जोखिम का सटीक अनुमान लगाना कठिन है।
सूक्ष्म गुरुत्वाकर्षण में लंबे समय तक रहने से हड्डियों और मांसपेशियों पर पड़ने वाला भार घटता है। वैज्ञानिक लंबे समय से उड़ान के दौरान हड्डियों के क्षय को दर्ज करते आए हैं, लेकिन इस बारे में कम प्रमाण हैं कि क्या उससे कई वर्ष बाद फ्रैक्चर होते हैं। नया विश्लेषण लंबी उड़ानों के बाद की अवधि पर केंद्रित है। इसी बीच नासा और वाणिज्यिक कंपनियां पृथ्वी से आगे अधिक लंबी यात्राओं की तैयारी कर रही हैं।
दल ने अंतरिक्ष यात्रियों की वार्षिक चिकित्सकीय जांच में दर्ज फ्रैक्चर की समीक्षा की। उसने पहली अंतरिक्ष उड़ान से पहले की अवधि, 90 दिन से कम अवधि की उड़ानों के बाद की अवधि और कम से कम एक ऐसी उड़ान के बाद की अवधि की तुलना की जो 90 दिन से लंबी थी। सीमित यात्रियों और अलग-अलग निगरानी अवधियों को ध्यान में रखने के लिए शोधकर्ताओं ने बेयज़ियन सांख्यिकीय मॉडल इस्तेमाल किए। सभी प्रकार के फ्रैक्चर को मिलाकर दर अधिक नहीं मिली, लेकिन लंबी उड़ानों के बाद कूल्हे के फ्रैक्चर की दर अधिक थी।
अध्ययन के अनुसार ये कूल्हे के फ्रैक्चर सामान्य आबादी में अपेक्षित उम्र से कम उम्र में हुए। लेखकों का कहना है कि इस प्रवृत्ति के कारण दीर्घकालिक अस्थि स्वास्थ्य की और जांच जरूरी है। साथ प्रकाशित संपादकीय ने चेताया कि छोटे समूह और दुर्लभ उड़ानें अनुमानों को अनिश्चित बनाती हैं। इसलिए निष्कर्ष यह साबित नहीं करते कि किसी खास उड़ान से किसी व्यक्ति का फ्रैक्चर हुआ, या भावी मिशनों का जोखिम कितना होगा।
शोधकर्ताओं के अनुसार हड्डी के घनत्व की सामान्य जांच उसकी संरचना में ऐसे बदलाव छोड़ सकती है जो फ्रैक्चर के जोखिम के लिए महत्वपूर्ण हों। अध्ययन संबंधी घोषणा के मुताबिक नासा ने उड़ान से पहले और बाद में अधिक विस्तृत कंप्यूटेड टोमोग्राफी स्कैन शुरू किए हैं। शोधकर्ता हड्डियों के द्रव्यमान, घनत्व और आंतरिक संरचना को एक साथ देखने का सुझाव देते हैं, ताकि पता चले कि यात्री कठिन शारीरिक गतिविधियों के लिए पर्याप्त रूप से कब स्वस्थ हुए हैं।
दल ने लंबे चंद्र मिशनों और संभावित मंगल यात्राओं से पहले व्यायाम, भोजन और दवाओं जैसे सुरक्षात्मक उपायों पर अधिक निगरानी और शोध की मांग की। इस अध्ययन ने कूल्हे के फ्रैक्चर रोकने के लिए किसी विशेष उपचार को प्रभावी साबित नहीं किया। इसका तत्काल संदेश यह है कि अंतरिक्ष में रहने के साथ-साथ पृथ्वी पर लौटने के बाद भी हड्डियों के स्वास्थ्य पर नजर रखनी चाहिए।
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