लगभग 194 वर्ष के विशाल कछुए जोनाथन का अध्ययन कर रहे वैज्ञानिकों को उसकी असाधारण लंबी उम्र से जुड़े आनुवंशिक संकेत मिले हैं। वैंडरबिल्ट हेल्थ और कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय के अनुसार, 7 अक्टूबर को साइंस एडवांसेज में प्रकाशित अध्ययन उसकी उम्र को कुछ जीन के असामान्य रूप से स्थिर नियंत्रण से जोड़ता है।
जोनाथन दक्षिण अटलांटिक के सेंट हेलेना द्वीप में प्लांटेशन हाउस में रहता है। कैम्ब्रिज के अनुसार, यह एल्डाब्रा विशाल कछुआ 1882 में सेशेल्स से वहां पहुंचा था और तब पूरी तरह वयस्क था। उसका अनुमानित जन्म वर्ष 1832 है; शोधकर्ता उसे दुनिया का सबसे अधिक उम्र वाला ज्ञात जीवित स्थलीय पशु बताते हैं।
कैम्ब्रिज के मुताबिक, टीम ने डीएनए की मरम्मत, सूजन, इंसुलिन नियंत्रण और कैंसर के दमन जैसी प्रक्रियाओं से जुड़े 287 विशिष्ट आनुवंशिक रूपांतर पहचाने। उसने जोनाथन के एपिजीनोम की तुलना उसी प्रजाति के युवा कछुओं से भी की। ये रासायनिक चिह्न डीएनए का क्रम बदले बिना जीन की गतिविधि नियंत्रित करते हैं।
कुछ नियंत्रण पैटर्न आश्चर्यजनक रूप से युवा दिखे। वैंडरबिल्ट के अनुसार, माइटोकॉन्ड्रिया के कार्य और आरएनए प्रसंस्करण से जुड़े जीन के प्रमोटर में कम मिथाइलेशन एंट्रॉपी थी, यानी उनके रासायनिक चिह्नों में अपेक्षाकृत कम अव्यवस्था थी। माइटोकॉन्ड्रिया कोशिकाओं को ऊर्जा देते हैं, इसलिए उनका संरक्षण उम्र संबंधी गिरावट के प्रतिरोध को समझने का संभावित रास्ता है।
वैंडरबिल्ट के मुताबिक, स्वास्थ्य की चिंता से रक्त लेने का अनुरोध अस्वीकार होने के बाद विश्लेषण में जोनाथन के गाल के अंदर से लिया ऊतक इस्तेमाल हुआ। निष्कर्ष केवल संबंध दिखाते हैं, यह साबित नहीं करते कि इन्हीं पैटर्न के कारण उसकी उम्र लंबी हुई। वे यह भी नहीं दिखाते कि मनुष्यों में ऐसे पैटर्न बदलने से जीवन सुरक्षित रूप से बढ़ेगा।
वैंडरबिल्ट के अनुसार, गैर-लाभकारी कालेल फाउंडेशन के वरिष्ठ लेखक स्टीफन क्लार्क ने कहा कि निष्कर्षों की पुष्टि के लिए रक्त से जुड़े और अध्ययन आवश्यक होंगे। संस्था अन्य दीर्घजीवी प्रजातियों और उम्र बढ़ने के मार्गों पर भी शोध करेगी। फिलहाल जोनाथन कोशिकीय सहनशीलता समझने की शुरुआत है, मानव बुढ़ापे का स्थापित उपचार नहीं।
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