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कांगो के इबोला प्रभावित शिविर से हजारों लोग भागे

प्रकाशित 2 अक्टूबर 2026 0 दृश्य

पूर्वी कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य के किगोंजे विस्थापित शिविर से सुरक्षा बलों के प्रवेश और उसके बाद हुई झड़पों के चलते हजारों लोग भाग गए हैं। इससे इबोला प्रकोप को रोकने के प्रयास बाधित हुए हैं। संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ इबोला समन्वयक जूलियन हार्नेस ने गुरुवार, 1 अक्टूबर को कहा कि इतुरी प्रांत का यह शिविर, जहां लगभग 19,000 लोग रहते थे, अब खाली है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने रॉयटर्स को बताया कि वायरस के संभावित संपर्क में आए बहुत से लोगों का अब तक पता नहीं चला है।

कांगो और स्वास्थ्य अधिकारियों के अनुसार सैनिक हथियारों की तलाश में शिविर गए थे और पिछले सप्ताह हुई झड़पों के दौरान निवासी भागे। इस पलायन ने इतुरी की स्वास्थ्य आपातस्थिति के साथ सुरक्षा संकट भी जोड़ दिया है। मौजूदा प्रकोप से इतुरी सबसे अधिक प्रभावित प्रांत है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार बंडीबुग्यो प्रजाति के इबोला वायरस का यह प्रकोप मई में कांगो और युगांडा में पुष्टि हुआ था।

स्थिति से परिचित दो स्वास्थ्य अधिकारियों ने रॉयटर्स से कहा कि शिविर में लगभग 1,000 ऐसे लोग रहते थे जिन्हें इबोला रोगियों का संपर्क माना गया था। उनमें से एक ने कहा कि बाद में टीमों ने केवल लगभग पांचवें हिस्से को खोजा। यह अनुमान संपर्क में आए लोगों का है, पुष्ट संक्रमितों का नहीं। खबर में बाकी लोगों का स्थान या स्वास्थ्य स्थिति स्थापित नहीं हुई है। लक्षणों की निगरानी और संक्रमण की शृंखला रोकने के लिए ऐसे लोगों को ढूंढना जरूरी है।

संयुक्त राष्ट्र ने बताया कि शिविर का एक इबोला ट्रांजिट केंद्र भी जल गया, जहां संदिग्ध मरीजों को अलग रखकर जांच और उपचार दिया जा सकता था। संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी ने रॉयटर्स को बताया कि कांगो के विस्थापित स्थलों पर किगोंजे सहित 88 पुष्ट मामले और 56 मौतें दर्ज हुई हैं; उसने कहा कि वास्तविक संख्या संभवतः अधिक है। रॉयटर्स ने पहले बताया था कि किगोंजे में एक महीने से थोड़ा अधिक समय में 30 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी, जिनमें कई इबोला से मरे थे।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के 29 सितंबर के आंकड़ों में कांगो में 8,224 पुष्ट मामले और 3,982 पुष्ट मौतें दर्ज थीं। संगठन के अनुसार बंडीबुग्यो प्रजाति के लिए कोई लाइसेंस प्राप्त टीका या विशेष उपचार नहीं है, हालांकि संभावित उपायों का अध्ययन जारी है। वह निगरानी, संपर्क खोज, चिकित्सकीय देखभाल और समुदायों के साथ काम करने में सहायता दे रहा है। शिविर से लोगों का जाना इन प्रयासों को कठिन बना सकता है और फैलाव की चिंता बढ़ाता है, लेकिन इस पलायन से हुए किसी नए संक्रमण की पुष्टि नहीं हुई है।

मानवीय और स्वास्थ्य टीमों के सामने अब विस्थापित संपर्कों को ढूंढने तथा असुरक्षा के बीच जांच और देखभाल की सुविधा बहाल करने का काम है। संयुक्त राष्ट्र और कांगो के अधिकारियों ने किगोंजे के सभी पूर्व निवासियों का स्थान नहीं बताया है। संपर्क खोज और मामलों की अगली रिपोर्ट से पता चलेगा कि टीमें जोखिम में आए परिवारों तक दोबारा पहुंचकर अतिरिक्त संक्रमण सीमित कर पाती हैं या नहीं।

स्रोत: Reuters; World Health Organization; United Nations High Commissioner for Refugees (via Reuters)

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