अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 19 अक्टूबर को कहा कि वह परमाणु हथियारों पर चर्चा के लिए चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने के लिए तैयार हैं। रॉयटर्स के अनुसार, व्हाइट हाउस के बाहर उन्होंने कहा कि व्यापार भी चर्चा में शामिल हो सकता है। उनकी टिप्पणी बातचीत में रुचि का संकेत थी, किसी तय शिखर बैठक की घोषणा नहीं।
क्रेमलिन ने कहा कि नेता नवंबर में चीन में होने वाले एशिया-प्रशांत आर्थिक सहयोग शिखर सम्मेलन के दौरान अलग से मिल सकते हैं। रॉयटर्स के अनुसार, प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने बताया कि इस संभावना पर बात हुई थी, लेकिन किसी ने बैठक या उसके एजेंडे पर ठोस प्रस्ताव अथवा समझौता पेश नहीं किया था।
यूक्रेन ने अपनी भागीदारी के बिना अपने भविष्य पर चर्चा का विरोध किया। विदेश मंत्री आंद्री सिबिहा ने कहा कि यूक्रेन, अमेरिका और रूस की बैठक शांति को आगे बढ़ा सकती है, जबकि रूस, चीन और अमेरिका का प्रारूप पुतिन को युद्ध जारी रखने के लिए प्रोत्साहित करेगा। रॉयटर्स के अनुसार, पेस्कोव ने कहा कि अंतिम समाधान के लिए कीव की भागीदारी आवश्यक होगी।
परमाणु बातचीत के रास्ते में चीन का रुख एक अलग बाधा है। विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता माओ निंग ने 16 अक्टूबर की प्रेस वार्ता में कहा कि चीन के परमाणु शस्त्रागार का आकार रूस और अमेरिका के शस्त्रागारों के बराबर नहीं है। उन्होंने इस चरण में त्रिपक्षीय निरस्त्रीकरण वार्ता की मांग को अनुचित और अव्यावहारिक बताया तथा कहा कि परमाणु हथियार घटाने की विशेष जिम्मेदारी वॉशिंगटन की है।
आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक डैरिल किमबॉल ने 19 अक्टूबर के बयान में द्विपक्षीय या बहुपक्षीय बातचीत के जरिए सार्थक सीमाओं का समर्थन किया। उन्होंने यह भी कहा कि रूस का युद्ध समाप्त करने वाली वार्ता में यूक्रेन को शामिल होना चाहिए। उनके आकलन में एपेक सम्मेलन के दौरान अलग से होने वाली बैठक अधिकतम निरंतर औपचारिक वार्ता की शुरुआत कर सकती है; प्रगति के लिए तैयारी और संतुलित, सत्यापन योग्य प्रस्ताव जरूरी होंगे।
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