अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 19 अक्टूबर को वाशिंगटन में एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर किए, जिसमें राष्ट्रीय स्वास्थ्य संस्थान (एनआईएच) में महिला स्वास्थ्य विभाग और व्हाइट हाउस में कार्यबल बनाने का निर्देश है। व्हाइट हाउस और रॉयटर्स के अनुसार, प्रथम महिला मेलानिया ट्रंप की समर्थित पहल का उद्देश्य शोध को बेहतर रोकथाम, निदान और उपचार में बदलना है।
आदेश के तहत 90 दिनों में एनआईएच के उपयुक्त संस्थान या केंद्र में विभाग स्थापित करना होगा। यह मौजूदा महिला स्वास्थ्य अनुसंधान कार्यालय के साथ समन्वय करेगा। रॉयटर्स के अनुसार यह कार्यालय 1990 से मौजूद है, इसलिए नया विभाग पहले से स्थापित अनुसंधान ढांचे में एक अतिरिक्त इकाई होगा।
व्हाइट हाउस ने हृदय रोग, कैंसर, एंडोमेट्रियोसिस, ऑस्टियोपोरोसिस और रजोनिवृत्ति सहित स्थितियों की समझ में कमियां बताईं। आदेश में नैदानिक परीक्षणों में महिलाओं और लड़कियों की भागीदारी बढ़ाने तथा जैविक लिंग को शोध में एक चर मानने पर अनुदान प्राप्तकर्ताओं की जवाबदेही तय करने की मांग है। इसका दायरा बचपन से गर्भावस्था और वृद्धावस्था तक है।
रॉयटर्स के मुताबिक स्वास्थ्य मंत्री रॉबर्ट एफ. केनेडी जूनियर और व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सूज़ी वाइल्स कार्यबल का नेतृत्व करेंगे। मेलानिया ट्रंप ने कहा कि चिकित्सा की प्रगति आय से परे सभी के लिए सस्ती और सुलभ होनी चाहिए। एंडोक्राइन सोसाइटी ने पहल का स्वागत किया; अध्यक्ष नैनेट सैंटोरो ने महिला स्वास्थ्य की लंबे समय से उपेक्षा और अपर्याप्त वित्तपोषण का उल्लेख किया।
आदेश जो बाइडन के समय महिला स्वास्थ्य शोध पर जारी मार्च 2024 के कार्यकारी आदेश और नवंबर 2023 के ज्ञापन को भी रद्द करता है। रॉयटर्स ने घोषणा को एनआईएच का वित्तपोषण और संघीय स्वास्थ्य कर्मचारियों की संख्या घटाने के ट्रंप प्रशासन के प्रयासों की पृष्ठभूमि में रखा। इस तरह पहल अनुसंधान सहायता में व्यापक बदलावों के बीच आई है।
आदेश के अनुसार क्रियान्वयन उपलब्ध बजटीय धन पर निर्भर रहेगा। 90 दिनों की समयसीमा में विभाग स्थापित करना अगला ठोस कदम है; बेहतर देखभाल के लक्ष्य अभी मरीजों के स्वास्थ्य परिणाम सुधरने का प्रमाण नहीं हैं। कार्यबल को वैज्ञानिक निष्कर्षों को नैदानिक व्यवहार और सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में लागू करने में मदद करनी है।
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