अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 8 अक्टूबर को कहा कि अमेरिका 3 नवंबर के कांग्रेस के मध्यावधि चुनाव से पहले ईरान पर हमला नहीं करेगा। रॉयटर्स के अनुसार, उन्होंने ट्रुथ सोशल पर यह फैसला बताया और युद्ध समाप्त करने के लिए तेहरान से बातचीत को सार्थक कहा।
यह बयान दोबारा लड़ाई की संभावित तैयारियों के बाद आया। एक्सियोस ने बताया कि पेंटागन ने सेंट्रल कमांड को बड़े अभियानों की तैयारी पूरी करने का निर्देश दिया था। ट्रंप ने यह भी कहा कि नाकेबंदी जारी रहेगी। घोषणा हमलों की बताई समयसीमा को सीमित करती है, लेकिन शांति समझौते की घोषणा नहीं करती।
एपी के अनुसार, जून का अंतरिम समझौता 60 दिन का युद्धविराम और स्थायी शांति का ढांचा बनाने के लिए था। नई सैन्य कार्रवाई और होर्मुज जलडमरूमध्य पर विवाद के बीच यह कुछ हफ्तों में टूट गया। युद्ध से पहले विश्व के लगभग पांचवें हिस्से का तेल इस मार्ग से गुजरता था, इसलिए इसका भविष्य दोनों देशों से आगे चिंता का विषय है।
गुरुवार को आर्थिक दबाव जारी रहा। अमेरिकी वित्त विभाग ने ईरानी तेल के परिवहन और प्रतिबंधों से बचने में मदद के आरोप में जहाजों और कंपनियों पर प्रतिबंध लगाए। मंत्री स्कॉट बेसेंट ने कहा कि कदमों का उद्देश्य तेहरान को युद्ध में इस्तेमाल होने वाली आय से वंचित करना है। नेटवर्क और उसकी भूमिका का यह वर्णन विभाग के आरोप हैं।
परमाणु मतभेद भी कायम रहे। रॉयटर्स ने ईरानी सरकारी मीडिया और परमाणु ऊर्जा प्रमुख के हवाले से बताया कि तेहरान न यूरेनियम संवर्धन छोड़ेगा, न अपना यूरेनियम भंडार सौंपेगा। अमेरिका और उसके सहयोगी ईरान पर परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश का आरोप लगाते हैं; तेहरान इससे इनकार करता है।
दोनों देशों के बीच चल रही इस प्रक्रिया में अगला कूटनीतिक कदम ईरान की ओर से आ सकता है। एपी के अनुसार, विदेश मंत्री अब्बास अराघची को कुछ दिनों में अमेरिकी प्रस्ताव पर औपचारिक जवाब की उम्मीद थी। फिलहाल सार्थक बातचीत के ट्रंप के दावे के साथ प्रतिबंध जारी हैं और संघर्ष खत्म करने की शर्तों पर मतभेद अनसुलझे हैं।
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