ब्रिटेन ने 20 अक्टूबर को घोषणा की कि बढ़ते हूती हमलों के बीच रॉयल एयर फोर्स के टाइफून विमान सऊदी अरब के ऊपर रक्षात्मक मिशन उड़ाएंगे। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने सहायता की घोषणा करते हुए कहा कि उड़ानें शहरों और अहम बुनियादी ढांचे को हवाई खतरों से बचाने में मदद करेंगी। रॉयटर्स और एपी ने भी इस फैसले की खबर दी।
रक्षा मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने कहा कि विमान सऊदी हवाई क्षेत्र को ड्रोन और मिसाइलों से बचाने में मदद करेंगे। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि ये विमान हूतियों के खिलाफ आक्रामक हमले नहीं करेंगे। एपी ने उनका काम जमीन पर लक्ष्य भेदने के बजाय हवा में खतरों को रोकना बताया।
ब्रिटिश रक्षा मंत्रालय की ओर से दी गई जानकारी के अनुसार, इस सैन्य सहायता पैकेज में सऊदी अरब के भीतर रक्षा सामग्री पहुंचाने के लिए एक ए400एम परिवहन विमान भी शामिल है। ब्रिटिश सैन्य सलाहकार सऊदी स्टाफ अधिकारियों की मदद करेंगे। ये कदम मौजूदा मदद बढ़ाते हैं, जिसमें पहले से वायु रक्षा उपकरण और कर्मी शामिल हैं।
अलग से मंत्रालय ने सऊदी रक्षात्मक अभियानों के लिए हवा में ईंधन भरने की सहायता बढ़ाई। इसमें यमन में उन हूती सैन्य ठिकानों पर हमले शामिल हैं जो सऊदी और यमनी लोगों को खतरा पहुंचाते हैं। ब्रिटेन ने सऊदी अनुरोध पर 22 सितंबर को पहली बार वॉयेजर टैंकर सहायता घोषित की थी। इसलिए टाइफून हमलों की सीमाएं पूरी ब्रिटिश सहायता का विवरण नहीं हैं।
लंदन ने फैसले को क्षेत्रीय सुरक्षा और आर्थिक जोखिमों से जोड़ा। रॉयटर्स के अनुसार, ब्रिटेन कहता है कि हूती हमले स्थिरता, ऊर्जा आपूर्ति और व्यापार मार्गों के लिए खतरा हैं। मंत्रालय ने चेताया कि खाड़ी में बढ़ती हिंसा ब्रिटेन में जीवनयापन महंगा कर सकती है और यमन का मानवीय संकट गहरा कर सकती है।
समाचार एजेंसी एसोसिएटेड प्रेस यानी एपी की रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन ने जोर दिया कि संघर्ष का सैन्य समाधान नहीं है। नई गश्त से उसकी सैन्य भागीदारी बढ़ेगी, जबकि सरकार कूटनीतिक समाधान का समर्थन जारी रखती है। घोषणा नियोजित सहायता बताती है; इससे पुष्टि नहीं होती कि नए लड़ाकू मिशन शुरू हो चुके हैं।
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