ब्रिटेन की कोविड-19 जांच की छठी रिपोर्ट ने पाया कि महामारी के दौरान वयस्क सामाजिक देखभाल क्षेत्र को पर्याप्त सुरक्षा नहीं मिली। रिपोर्ट 20 अक्टूबर 2026 को प्रकाशित हुई। स्काई न्यूज के अनुसार, अध्यक्ष हीदर हैलेट ने यह दावा खारिज किया कि देखभाल गृह शुरू से प्रभावी रूप से सुरक्षित थे। निष्कर्ष भविष्य की आपात स्थितियों की तैयारी में कमजोर निवासियों की सुरक्षा को केंद्र में रखते हैं।
कैबिनेट ऑफिस के अनुसार, रिपोर्ट में इंग्लैंड, स्कॉटलैंड, वेल्स और उत्तरी आयरलैंड शामिल हैं। इसके दायरे में आवासीय देखभाल, घरों में पेशेवर सहायता और रिश्तेदारों या मित्रों की अवैतनिक देखभाल आती है। जांच केवल अस्पतालों पर ध्यान देने के बजाय सरकारी फैसलों, संक्रमण रोकने के उपायों और क्षेत्र की प्रतिक्रिया क्षमता की समीक्षा करती है।
द केयर होम एनवायरनमेंट के विवरण के अनुसार, एनएचएस की क्षमता बनाए रखने को प्राथमिकता मिली, जबकि आपातकालीन निर्णयों में सामाजिक देखभाल का प्रतिनिधित्व पर्याप्त नहीं था। शुरू में अस्पतालों के मरीज नियमित जांच की अनिवार्यता के बिना देखभाल गृहों में पहुंचे और सुरक्षा उपाय देर से आए। संस्थानों को सुरक्षा उपकरण जुटाने और बदलते निर्देश समझने में भी कठिनाई हुई।
स्काई न्यूज ने बताया कि कर्मचारियों ने अस्थायी सुरक्षा के लिए कचरे की थैलियों और बरसाती पोंचो का इस्तेमाल किया तथा रिपोर्ट में आठ प्रमुख सिफारिशें हैं। चैनल ने शोकग्रस्त परिवारों द्वारा पूर्व स्वास्थ्य मंत्री मैट हैनकॉक के सुरक्षा संबंधी आश्वासनों को खारिज करने की भी खबर दी। ये प्रतिक्रियाएं महामारी के प्रबंधन से जुड़ी हैं, किसी नए प्रकोप की घोषणा से नहीं।
द केयर होम एनवायरनमेंट के अनुसार, मुलाकातों पर पाबंदियों से कल्याण प्रभावित हुआ, खासकर डिमेंशिया वाले निवासियों और जीवन के अंतिम चरण में पहुंचे लोगों का। परिवार लंबे समय तक अलग रहे। जांच ने कर्मचारियों पर दबाव भी पहचाना और आपात नीतियां बनाते समय संस्थानों, देखभाल पाने वालों तथा अवैतनिक देखभालकर्ताओं से अधिक परामर्श की मांग की।
विशेषज्ञ प्रकाशन के अनुसार, सिफारिशें तैयारी की व्यवस्थाओं में सामाजिक देखभाल को स्पष्ट स्थान देने और सूचना साझा करने में सुधार की मांग करती हैं। हैलेट ने व्यापक केसी समीक्षा का इंतजार किए बिना औपचारिक सरकारी जवाब देने को कहा है। कैबिनेट ऑफिस के अनुसार, अन्य रिपोर्टें 2027 तक आती रहेंगी; सिफारिशों के प्रकाशन का अर्थ यह नहीं कि उन पर अमल हो गया है।
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