संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम ने मंगलवार को मंगोलिया की राजधानी उलानबटार में सूखा सहनशीलता क्षमता के एक प्रस्तावित वैश्विक सूचकांक की शुरुआत की। यह उपकरण सरकारों को यह परखने का साझा तरीका देगा कि वे सूखे का पूर्वानुमान लगाने, उसके लिए तैयारी करने और उसके अनुरूप ढलने में कितनी सक्षम हैं। यूएनईपी ने मरुस्थलीकरण से निपटने वाले संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन की कॉप17 बैठक में तकनीकी रिपोर्ट पेश की, ताकि बिखरे जलवायु आंकड़ों को व्यावहारिक फैसलों और निवेश की प्राथमिकताओं में बदला जा सके।
प्रस्तावित सूचकांक में नौ संकेतक हैं, जिन्हें पूर्वानुमान, तैयारी और अनुकूलन के तीन आयामों में बांटा गया है। यूएनईपी ने इसे मौजूदा जानकारी पर आधारित राष्ट्रीय स्व-मूल्यांकन उपकरण बताया, जो एक स्पष्ट और तुलनीय अंक दे सकता है। इससे पता चलेगा कि किसी देश की क्षमता कहां मजबूत है और कहां कमी है। यह किसी खास सूखे की तीव्रता नहीं, बल्कि तैयारी और संस्थागत कार्यक्षमता को मापेगा।
यूएनईपी के अनुसार अंतरराष्ट्रीय निगरानी व्यवस्थाएं छह बहुपक्षीय पर्यावरण समझौतों में सूखे से जुड़े 30 से 50 संकेतकों को सीधे और लगभग 100 अन्य संकेतकों को अप्रत्यक्ष रूप से पहले ही दर्ज करती हैं। फिर भी ये जानकारियां बिखरी हुई हैं और सूखा सहनशीलता का एक स्पष्ट माप नहीं देतीं। नया ढांचा जोखिम संबंधी जानकारी और पूर्व चेतावनी को योजना, सामाजिक सुरक्षा, दीर्घकालीन अनुकूलन, वित्तपोषण और परिणामों के मूल्यांकन से जोड़ेगा।
एजेंसी ने व्यापक उपयोग से पहले इच्छुक देशों में इस पद्धति का परीक्षण करने का प्रस्ताव रखा और सरकारों से इसे बेहतर बनाने में सहयोग मांगा। इसका उद्देश्य पर्यावरण संस्थाओं के साथ वित्त और योजना मंत्रालयों के फैसलों में भी मदद देना है। सूचकांक मौजूदा पर्यावरण समझौतों की रिपोर्टिंग में शामिल हो सकता है और संयुक्त राष्ट्र मरुस्थलीकरण सम्मेलन तथा अंतरराष्ट्रीय सूखा सहनशीलता गठबंधन की वेधशाला के सूचकांक का पूरक बनेगा, उसका स्थान नहीं लेगा।
यह पहल ऐसे समय आई है जब सूखा सार्वजनिक जलापूर्ति, कृषि, ऊर्जा, पारिस्थितिकी तंत्र और आजीविका को परस्पर जुड़ा नुकसान पहुंचा रहा है। यूएनईपी ने कहा कि भूमि क्षरण, मरुस्थलीकरण और सूखा तीन अरब लोगों को प्रभावित करते हैं और हर साल सैकड़ों अरब डॉलर की क्षति पहुंचाते हैं। आपदा जोखिम न्यूनीकरण के संयुक्त राष्ट्र कार्यालय के अनुसार बेहतर पूर्व चेतावनी, जोखिम आधारित निवेश और एकीकृत प्रबंधन जरूरी हैं, क्योंकि एक क्षेत्र की बाधा भोजन व्यवस्था और सार्वजनिक सेवाओं तक फैल सकती है।
रिपोर्ट कॉप17 के दौरान पेश की गई, जो 17 से 28 अगस्त तक चल रही है और सम्मेलन के 197 पक्षों के प्रतिनिधियों को साथ लाती है। यूरोपीय आयोग ने इस शोध को वित्त दिया और उसके संयुक्त अनुसंधान केंद्र, मरुस्थलीकरण सम्मेलन, अंतरराष्ट्रीय गठबंधन तथा संयुक्त राष्ट्र आपदा जोखिम न्यूनीकरण कार्यालय ने इसे विकसित किया। अगला कदम प्रायोगिक देशों को जोड़ना, अलग-अलग राष्ट्रीय परिस्थितियों में नौ संकेतकों को जांचना और व्यापक स्वीकृति से पहले पद्धति में सुधार करना है।
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