लावा ग्रह TOI-561 b तीव्र तारकीय विकिरण के बावजूद परावर्तक वायुमंडल बनाए रखता दिखता है। यह संकेत उस शोध से मिला जिसे वाटरलू विश्वविद्यालय ने 26 अक्टूबर और बर्मिंघम विश्वविद्यालय की सामग्री के आधार पर साइंस डेली ने 27 अक्टूबर को प्रस्तुत किया। अवलोकन पहले के अध्ययनों से मिले वायुमंडल की मौजूदगी के संकेतों को और मजबूत करते हैं, लेकिन उसकी रासायनिक संरचना तय नहीं करते।
वाटरलू की लीजा डैंग और सहयोगियों ने जेम्स वेब अंतरिक्ष दूरबीन से 37 घंटे तक ग्रह देखा, जिसमें लगभग चार परिक्रमाएं शामिल थीं। अध्ययन द एस्ट्रोनॉमिकल जर्नल में है और उसका प्रारंभिक संस्करण अगस्त से उपलब्ध है। दल ने कक्षा के दौरान चमक और तापीय उत्सर्जन में बदलाव मापे। फेज कर्व नामक इस तकनीक से इस बात का अध्ययन हुआ कि ग्रह अपने तारे से मिलने वाली ऊर्जा को अलग-अलग हिस्सों में किस तरह वितरित करता है।
पुराने अवलोकनों में दिन वाला हिस्सा खुली, गहरी चट्टान की तुलना में अपेक्षा से ठंडा था। हमेशा अंधेरे हिस्से तक ऊष्मा पहुंचने से कुछ अंतर समझ आता है, लेकिन नए रात्रि माप पूरा अंतर नहीं समझाते। वाटरलू के अनुसार ग्रह को लगभग तीन चौथाई तारकीय प्रकाश परावर्तित करना चाहिए, शुक्र की तरह, और अपनी सतह पर ऊष्मा भी बांटनी चाहिए।
शोधकर्ताओं ने अवलोकनों की तुलना जलवायु सिमुलेशन से की। अध्ययन उच्च परावर्तन की संभावित वजह सिलिकॉन डाइऑक्साइड और मैग्नीशियम सिलिकेट के बादलों को बताता है। प्रकाशित हिस्से में दिन-रात की सीमा के पास अनुकूल स्थितियां हैं। ये मॉडल पर आधारित संभावनाएं हैं, बादलों की रासायनिक पहचान का प्रत्यक्ष प्रमाण नहीं। नतीजे उस धारणा को चुनौती देते हैं कि तीव्र विकिरण ऐसे चट्टानी ग्रहों के घने वायुमंडल छीन लेता है।
वायुमंडल की संरचना और उसका टिके रहना ऐसे प्रश्न हैं जिनका वैज्ञानिकों को अभी निश्चित उत्तर नहीं मिला है। वाटरलू कार्बन डाइऑक्साइड और सल्फर डाइऑक्साइड को संभावनाएं बताता है; पिघले आंतरिक हिस्से की गैसें वायुमंडल की भरपाई कर सकती हैं। डैंग के अनुसार वेब से लंबी तरंगदैर्ध्य पर अवलोकन इन परिदृश्यों में अंतर कर सकेंगे। अगला वैज्ञानिक काम प्रस्तावित रसायन जांचना और समझाना है कि इस चरम ग्रह ने अपना गैसीय आवरण कैसे बचाए रखा।
टिप्पणियाँ