विश्व स्वास्थ्य संगठन और उसके साझेदारों ने गर्भावस्था में उच्च रक्तचाप से होने वाली मौतें घटाने के लिए आठ अक्टूबर को एक योजना शुरू की। संगठन और यूट्रेक्ट विश्वविद्यालय चिकित्सा केंद्र के अनुसार, इसे नीदरलैंड के यूट्रेक्ट में सोसाइटी फॉर मैटरनल-फीटल मेडिसिन की वैश्विक कांग्रेस में पेश किया गया। योजना 2026–2035 और उसके बाद की अवधि को शामिल करती है।
संगठन का अनुमान है कि ये विकार 10–15 प्रतिशत गर्भावस्थाओं को प्रभावित करते हैं और लगभग 16 प्रतिशत मातृ मौतों, यानी सालाना करीब 42,000 मौतों का कारण हैं। इनका संबंध पांच लाख से अधिक मृत शिशु जन्मों और नवजात मौतों से भी है। प्री-एक्लेम्पसिया इस पहल में शामिल स्थितियों में से एक है।
संगठन ने रक्तचाप की जांच, मूत्र में प्रोटीन की जांच तथा एस्पिरिन, रक्तचाप घटाने की दवाओं और मैग्नीशियम सल्फेट तक पहुंच में कमियां बताईं। प्रशिक्षित कर्मियों की कमी, कमजोर रेफरल व्यवस्था और सीमित आपात प्रसूति सेवाएं उपचार में देरी कर सकती हैं। उसके अनुसार गरीबी, अलगाव और मानवीय संकट जोखिम बढ़ाते हैं।
यूट्रेक्ट केंद्र के अनुसार योजना पांच प्राथमिकताओं को जोड़ती है: शोध, चिकित्सकीय मानक, चिकित्सा उत्पाद, क्रियान्वयन और जवाबदेही। उसके शोधकर्ताओं ने अंतरराष्ट्रीय साझेदारों और रोगी समूहों के साथ ढांचा तैयार करने में योगदान दिया। केंद्र का कहना है कि अब चुनौती प्रतिबद्धताओं को समय पर पहचान और बेहतर देखभाल में बदलने की है।
संगठन ने प्री-एक्लेम्पसिया या एक्लेम्पसिया की रोकथाम अथवा उपचार के लिए विशेष रूप से विकसित और स्वीकृत दवाओं की कमी रेखांकित की। उसके अनुसार मई 2026 में 140 से अधिक साझेदारों ने मिलकर शोध की 20 प्राथमिकताएं तय कीं। योजना बेहतर पूर्वानुमान, पहचान और उपचार की ओर निवेश बढ़ाना चाहती है।
यूट्रेक्ट केंद्र ने घाना और तंजानिया में जोखिम के पूर्वानुमान तथा देखभाल संबंधी शोध का उल्लेख किया, जिसमें घाना में घर पर रक्तचाप की निगरानी शामिल है। उसके अनुसार सहयोग को अब व्यावहारिक कार्रवाई में बदलना होगा। संगठन की रूपरेखा मजबूत स्वास्थ्य प्रणालियों और गुणवत्तापूर्ण देखभाल तक समान पहुंच को प्राथमिकता देती है, खासकर निम्न और मध्यम आय वाले देशों में।
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