विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 2 अक्टूबर 2026 को जारी अनुमानों में बताया कि वैश्विक जीवन प्रत्याशा 2023 में लगभग महामारी से पहले के स्तर पर लौट आई, लेकिन अच्छे स्वास्थ्य में बिताए जाने वाले वर्षों में सुधार धीमा रहा। वैश्विक आंकड़े असमान बहाली और दीर्घकालिक बीमारियों का बढ़ता बोझ दिखाते हैं।
संगठन के अनुसार जीवन प्रत्याशा 73.3 वर्ष रही, जबकि 2019 में यह 73.4 वर्ष थी। एएफपी ने बताया कि कोरोना संकट के दौरान 2021 में यह गिरकर 71.5 वर्ष रह गई थी। स्वस्थ जीवन प्रत्याशा 2023 में 62.8 वर्ष तक पहुंची, फिर भी 2019 से 0.4 वर्ष कम थी। ये ऐतिहासिक अनुमान हैं, 2026 की स्वास्थ्य स्थिति का मापन नहीं।
नए वैश्विक स्वास्थ्य अनुमान 2000 से 2023 की अवधि को समेटते हैं। संगठन के अनुसार दुनिया भर में गैर-संचारी रोगों से होने वाली मौतों की हिस्सेदारी 2023 में 74% थी, जबकि 2000 में 58% थी। मृत्यु के दस प्रमुख कारणों में आठ ऐसे रोग थे, जो स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ी बदलती जरूरतों को दर्शाते हैं।
संगठन के अनुसार इस्कीमिक हृदय रोग से 2023 में करीब 95 लाख मौतें हुईं। मृत्यु के कारणों में डिमेंशिया पांचवें स्थान पर था, जबकि 2000 में उन्नीसवें स्थान पर था। इस दौरान डिमेंशिया से मौतों की संख्या तीन गुनी हुई। एएफपी ने यह भी बताया कि 2023 में कोविड-19 मृत्यु के दस प्रमुख कारणों की सूची से बाहर हो गया।
रिपोर्ट मानसिक स्वास्थ्य संबंधी बढ़ता बोझ भी बताती है। 2019 से 2023 के बीच आयु-मानकीकृत विकलांगता-समायोजित जीवन वर्षों की दरें अवसाद संबंधी विकारों में लगभग 20% और चिंता संबंधी विकारों में करीब 45% बढ़ीं। यह माप विकलांगता तथा समय से पहले मृत्यु से खोए स्वस्थ वर्ष दर्शाता है; ये प्रतिशत निदान किए गए मामलों की संख्या में बढ़ोतरी नहीं हैं।
संगठन के डेटा निदेशक एलेन लाब्रिक ने कहा कि चुनौती लंबी जिंदगी को अधिक स्वस्थ बनाना और सेवाओं को बदलती जरूरतों के अनुरूप ढालना है। संगठन ने कहा कि अनुमान देशों को स्वास्थ्य प्राथमिकताएं तय करने और डेटा विश्लेषण की क्षमता मजबूत करने में मदद करेंगे, जिससे भविष्य की कार्रवाई के लिए साक्ष्य मिलेंगे।
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