विश्व स्वास्थ्य संगठन ने 15 अक्टूबर को देशों से दुनिया भर में सीसे की विषाक्तता की रोकथाम तेज करने का आग्रह किया। उसके नए विवरण में 2027 के लिए वैश्विक कार्ययोजना और तकनीकी मार्गदर्शन की तैयारी बताई गई है। बच्चों और वयस्कों की सुरक्षा के लिए संपर्क के स्रोत हटाने को इन प्रयासों के केंद्र में रखा गया है।
संगठन के अनुसार सदस्य देशों ने सीसे का प्रभाव घटाने के लिए वैश्विक कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया है, जिसे 2027 में विश्व स्वास्थ्य सभा में पेश किया जाएगा। अगले साल आने वाला अलग तकनीकी पैकेज प्रिवेंट भी सरकारों को प्रमुख स्रोत पहचानने, उपाय चुनने, नियम लागू करने और प्रगति की निगरानी में मदद करेगा।
स्वास्थ्य पर इसका बोझ बड़ा है। संगठन के जून 2026 के तथ्यपत्र में ऐसे अनुमान दिए गए हैं जो 2023 में दुनिया भर में 35 लाख से अधिक मौतों को सीसे के संपर्क से जोड़ते हैं, मुख्यतः हृदय और रक्तवाहिकाओं पर असर के कारण। संपर्क का कोई ज्ञात हानिरहित स्तर नहीं है। बच्चों के मस्तिष्क विकास को स्थायी क्षति और वयस्कों को हृदय, रक्तवाहिका तथा गुर्दे की समस्याएं हो सकती हैं।
पुराना शोध बच्चों में संपर्क का पैमाना दिखाता है। जुलाई 2020 की यूनिसेफ और प्योर अर्थ की रिपोर्ट ने अनुमान लगाया था कि 80 करोड़ तक बच्चों, यानी दुनिया में लगभग हर तीसरे बच्चे, के रक्त में प्रति डेसीलीटर कम से कम पांच माइक्रोग्राम सीसा था। यह पुराना अनुमान है, 2026 की नई गिनती नहीं। इस सीमा का अर्थ यह भी नहीं कि उससे नीचे का स्तर सुरक्षित है।
संगठन दूषित धूल, भोजन और पानी के साथ औद्योगिक गतिविधियों तथा सीसे वाले उत्पादों को संपर्क के रास्ते बताता है। उसके तथ्यपत्र के अनुसार जनवरी 2024 में 48 प्रतिशत देशों में सीसे वाले पेंट पर कानूनी रूप से बाध्यकारी नियंत्रण थे। यह दिनांकित आकलन नियमों की कमी दिखाता है, लेकिन यह नहीं बताता कि आज कितने देशों में ऐसे कानून हैं।
अक्टूबर की घोषणा में ब्राजील, भारत के पांच राज्यों, नेपाल और छह अफ्रीकी देशों में रक्त में सीसे की जांच करने वाली प्रयोगशालाओं को सहायता भी शामिल है। ये देश इथियोपिया, घाना, मलावी, रवांडा, दक्षिण अफ्रीका और तंजानिया हैं। संगठन के अगले कदम बेहतर पहचान और स्रोत पर संपर्क की रोकथाम को जोड़ते हैं, जबकि नीतिगत उपकरण 2027 के लिए प्रस्तावित हैं।
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