लगभग 80 देशों ने गुरुवार, 24 सितंबर को होर्मुज़ जलडमरूमध्य को तत्काल फिर खोलने की मांग की। संयुक्त राष्ट्र में बहरीन के विदेश मंत्री अब्दुल्लतीफ़ बिन राशिद अल ज़यानी ने उनका साझा बयान पढ़ा। हस्ताक्षर करने वाले देशों ने कहा कि इस समुद्री मार्ग को प्रभावित करने वाली पाबंदियां और हमले अंतरराष्ट्रीय नौवहन, ऊर्जा सुरक्षा तथा व्यापार के लिए खतरा हैं। रॉयटर्स और समुद्री समाचार प्रकाशन जीकैप्टन के अनुसार उन्होंने जहाजों के सुरक्षित आवागमन और बिना शुल्क या अतिरिक्त शर्तों के रास्ता देने को कहा।
यह बयान न्यूयॉर्क में विश्व नेताओं की वार्षिक बैठक के दौरान आया। फ़ारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी के बीच का मार्ग ईरान, अमेरिका और इज़राइल से जुड़े संघर्ष के कारण अब भी गंभीर रूप से बाधित है। होर्मुज़ खाड़ी क्षेत्र से तेल और गैस निर्यात का एक प्रमुख रास्ता है। इसलिए इसकी उपलब्धता पर विवाद उन देशों के लिए भी आर्थिक और राजनयिक चिंता का विषय है जो सीधे लड़ाई में शामिल नहीं हैं।
अल ज़यानी द्वारा पढ़े गए बयान में ईरान पर जलडमरूमध्य में नौवहन के अधिकारों और स्वतंत्रता को खतरे में डालने का आरोप लगाया गया। इसमें यमन में हूती लड़ाई फिर शुरू होने, सऊदी अरब पर हमलों और लाल सागर में जहाजों पर हमलों की भी निंदा की गई। हस्ताक्षरकर्ताओं ने चेताया कि बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य की ओर हूतियों की बढ़त दूसरे अहम व्यापार मार्ग पर खतरा बढ़ाएगी। ये आरोप बयान का समर्थन करने वाले देशों का पक्ष हैं।
रॉयटर्स के मुताबिक समूह में खाड़ी के अरब देश और प्रमुख पश्चिमी शक्तियां शामिल हैं। जीकैप्टन के अनुसार देशों ने मार्च में पारित संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के एक प्रस्ताव का समर्थन भी दोहराया। उस प्रस्ताव ने खाड़ी देशों पर हमलों और समुद्री यातायात में बाधा की निंदा की थी। नए बयान में सभी जहाजों का पूरा आवागमन बहाल करने और खतरे के बावजूद क्षेत्र में काम कर रहे व्यापारिक जहाजों के चालक दल की सुरक्षा पर जोर दिया गया।
रॉयटर्स के अनुसार ईरान और हूती अपनी कार्रवाइयों को रक्षात्मक बताते हैं। इस सप्ताह की शुरुआत में एक ईरानी अधिकारी ने एजेंसी से कहा था कि यदि अमेरिका सैन्य दबाव घटाए और ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी हटाए तो तेहरान सात दिन में होर्मुज़ खोल सकता है। इस शर्त वाले प्रस्ताव के बाद मार्ग फिर खुलने की पुष्टि नहीं हुई है। गुरुवार का बयान इसलिए एक राजनयिक मांग है, संघर्ष के पक्षों के बीच हुआ समझौता नहीं।
होर्मुज़ और लाल सागर में एक साथ बाधाएं माल ढुलाई, बीमा और ऊर्जा आपूर्ति को प्रभावित कर सकती हैं। संयुक्त राष्ट्र व्यापार और विकास संस्था ने 17 सितंबर को सुरक्षा परिषद की बैठक में कहा था कि समुद्री संकरे मार्गों में रुकावट का असर परिवहन लागत, खाद्य कीमतों और परिवारों के बजट तक पहुंच सकता है। बयान का समर्थन करने वाले देशों ने कहा कि वे सुरक्षा की स्थिति सामान्य यातायात की अनुमति देने तक समुद्री संस्थाओं और क्षेत्रीय साझेदारों के साथ काम जारी रखेंगे।
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