होम पर वापस जाएं टैंकर हमले बढ़ने के बाद ब्रेंट कच्चा तेल 100 डॉलर के ऊपर बंद व्यापार

टैंकर हमले बढ़ने के बाद ब्रेंट कच्चा तेल 100 डॉलर के ऊपर बंद

प्रकाशित 10 सितंबर 2026 0 दृश्य

ब्रेंट कच्चा तेल बुधवार, 9 सितंबर को 100 डॉलर प्रति बैरल के ऊपर बंद हुआ। अमेरिका और ईरान के तेल टैंकरों पर हमलों से मध्य पूर्व की आपूर्ति और वैश्विक महंगाई को लेकर चिंता बढ़ी। रॉयटर्स के अनुसार, निकट अवधि का ब्रेंट अनुबंध 3.29 डॉलर या 3.4 प्रतिशत बढ़कर 101.21 डॉलर पर बंद हुआ, जबकि दिन में यह 101.58 डॉलर तक पहुंचा। अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट 3.02 डॉलर या 3.25 प्रतिशत चढ़कर 96.05 डॉलर पर पहुंचा। दोनों मानक तेलों का यह 22 मई के बाद सबसे ऊंचा बंद स्तर था और जुलाई के अंत में एक दिन के बाद पहली बार ब्रेंट 100 डॉलर से ऊपर बंद हुआ।

यह तेजी उस घटनाक्रम के बाद आई जिसे रॉयटर्स ने छह महीने पुराने संघर्ष में जहाजरानी पर जवाबी हमलों की सबसे बड़ी घोषित लहर बताया। अमेरिकी सेना ने कहा कि ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड द्वारा अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत को दो बार बैलिस्टिक मिसाइल से निशाना बनाए जाने के बाद उसने पांच ईरानी तेल टैंकर नष्ट किए। ईरान ने कहा कि उसने इसके बाद दो अमेरिकी जहाजों और आठ टैंकरों पर गोलीबारी की तथा जॉर्डन में अमेरिकी बलों द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले अड्डे की ओर मिसाइलें दागीं। चार्टर कंपनी पेनिनसुला के अनुसार, दुबई के पास लंगर डाले हरक्यूलिस स्टार पर हमला होने से एक नाविक की मौत हुई और एक अन्य लापता है।

होर्मुज जलडमरूमध्य आपूर्ति का सबसे बड़ा जोखिम बना हुआ है, क्योंकि युद्ध से पहले दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से का तेल और गैस इसी रास्ते से गुजरता था। रॉयटर्स द्वारा उद्धृत केप्लर के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार मंगलवार को छह कमोडिटी जहाज यहां से गुजरे, जबकि एक दिन पहले नौ जहाज और दस दिन का औसत लगभग 12 था। रिस्टैड एनर्जी ने अनुमान लगाया कि तेल प्रवाह घटकर प्रतिदिन 20 लाख बैरल से नीचे आ गया, जबकि 30 अगस्त को लड़ाई फिर शुरू होने से पहले के सप्ताह में यह 80 से 90 लाख बैरल था। सऊदी प्रतिष्ठानों और लाल सागर की जहाजरानी पर हमलों ने महत्वपूर्ण वैकल्पिक मार्ग पर भी दबाव डाला है।

वायदा कीमतों की तेजी पहले से तंग वास्तविक बाजार के करीब पहुंच रही है। रॉयटर्स के अनुसार, दुनिया की लगभग दो-तिहाई तेल आपूर्ति का मूल्य तय करने वाला डेटेड ब्रेंट 3 सितंबर से 100 डॉलर के ऊपर है। एसएंडपी ग्लोबल के मुताबिक, अमेरिकी ऊर्जा सूचना प्रशासन ने मध्य पूर्व के घटे निर्यात का हवाला देते हुए 2026 के औसत ब्रेंट मूल्य का अनुमान 87 डॉलर से बढ़ाकर 91 डॉलर प्रति बैरल कर दिया। एसएंडपी ग्लोबल के जहाजरानी आंकड़ों ने यह भी दिखाया कि दूसरी तिमाही में खाड़ी से अधिक सल्फर वाले कच्चे तेल का निर्यात औसतन 58.8 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, जो एक साल पहले से 65 प्रतिशत कम है।

उपभोक्ता और कारोबार ऊंची लागत पहले ही सह रहे हैं। एपी ने एएए के आंकड़ों के आधार पर बताया कि बुधवार को अमेरिका में सामान्य पेट्रोल का औसत मूल्य 4.22 डॉलर प्रति गैलन था, जो युद्ध से पहले के 2.98 डॉलर से लगभग 42 प्रतिशत अधिक है। डीजल 5.94 डॉलर के सांकेतिक रिकॉर्ड पर पहुंचा, जो लगभग 58 प्रतिशत की वृद्धि है। ट्रक परिवहन, खेती और जहाजरानी में डीजल की केंद्रीय भूमिका होने के कारण बढ़ी लागत भोजन, पार्सल और निर्मित वस्तुओं तक पहुंच सकती है। आयात पर निर्भर एशियाई और अफ्रीकी अर्थव्यवस्थाओं को खाड़ी की कम आपूर्ति तथा ऊंचे मालभाड़े और बीमा लागत से विशेष जोखिम है।

इस झटके का असर वित्तीय बाजारों पर भी पड़ा। एपी के अनुसार एसएंडपी 500 में 0.5 प्रतिशत, डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज में 0.8 प्रतिशत और नैस्डैक कंपोजिट में 0.6 प्रतिशत गिरावट आई, जबकि अधिकांश दूसरे क्षेत्रों के गिरने के बीच ऊर्जा शेयर बढ़े। व्यवधान कितने समय तक रहता है, यही अब मुख्य अनिश्चितता है। 100 डॉलर से ऊपर थोड़े समय की तेजी का स्थायी असर कम होगा, लेकिन होर्मुज में लंबे प्रतिबंध ईंधन महंगा रख सकते हैं, महंगाई का दबाव बढ़ा सकते हैं और ब्याज दर के फैसलों को कठिन बना सकते हैं। व्यापारी आपूर्ति सुधरने के संकेतों के लिए टैंकर यातायात, नई सैन्य कार्रवाई और कूटनीतिक प्रयासों पर नजर रखेंगे।

स्रोत: Reuters, Associated Press, U.S. Energy Information Administration, S&P Global Commodity Insights

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