इटली ने गुरुवार 6 अगस्त को अपनी राष्ट्रीय गर्मी निगरानी व्यवस्था में शामिल सभी 27 शहरों को सबसे ऊंचे रेड अलर्ट पर रखा, जबकि यूरोप के कई हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर चला गया। एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार इसी लू ने ऑस्ट्रिया में राष्ट्रीय तापमान रिकॉर्ड बनाया, सूखे और आग की स्थिति गंभीर की तथा मध्य यूरोप से भूमध्यसागर तक ऊर्जा और परिवहन प्रणालियों को बाधित किया।
इटली के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक यह व्यवस्था उत्तर-पूर्व के ट्रिएस्टे से सिसिली के पलेर्मो तक शहरों की निगरानी करती है और स्वास्थ्य के लिए खतरनाक मौसम की पहचान करती है। रेड अलर्ट का अर्थ है कि गर्मी पूरी आबादी के लिए जोखिम है, केवल बुजुर्गों, बच्चों और पुरानी बीमारी वाले लोगों के लिए नहीं। अधिकारियों ने सबसे गर्म घंटों में सीधी धूप से बचने, संभव हो तो भीतर रहने और नियमित पानी पीने की सलाह दी।
पर्यटन अधिकारियों ने रोम के कोलोसियम और पैंथियन सहित प्रमुख स्थलों के शाम के खुलने का समय बढ़ाया। कोलोसियम के प्रवेश द्वारों पर ठंडी फुहार वाले पंखे और अतिरिक्त चिकित्सा केंद्र भी लगाए गए। ये कदम उन घने शहरों पर दबाव दिखाते हैं जहां पत्थर की सतहें और गर्मियों की भारी पर्यटक भीड़ जोखिम बढ़ाती हैं, जबकि लाखों लोगों को शीतलन और चिकित्सा सहायता की अधिक जरूरत पड़ती है।
जियोस्फीयर ऑस्ट्रिया ने बुधवार को स्लोवाकिया सीमा के पास बाड डॉइच-अल्टेनबुर्ग में 41.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया, जो देश में अब तक का सर्वाधिक तापमान है। मौसम सेवा ने बताया कि जनवरी से जून तक राष्ट्रीय वर्षा दीर्घकालीन औसत से 27 प्रतिशत कम रही और पूर्वी क्षेत्रों के कुछ हिस्सों को सामान्य बारिश का केवल आधा मिला। जलवायु विज्ञानी अलेक्जेंडर ओरलिक ने कहा कि कुछ क्षेत्रों ने 1885 के बाद ऐसा सूखापन नहीं देखा था।
सूखे से डेन्यूब नदी का जलस्तर भी घटा। एपी के अनुसार हंगरी के एकमात्र परमाणु बिजलीघर के संचालकों ने उत्पादन सामान्य स्तर के करीब 10 प्रतिशत तक घटा दिया, क्योंकि संयंत्र ठंडा रखने के लिए नदी के पानी पर निर्भर है। अधिकारियों ने घरों और बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं से शाम की अधिक मांग के समय बिजली बचाने को कहा, उन घंटों में मालगाड़ियों पर रोक लगाई और बुडापेस्ट की सजावटी रोशनी बंद की। जर्मनी ने नदी परिवहन, उद्योग और आपूर्ति व्यवस्था पर असर की चेतावनी दी।
यूरोपीय संघ की कोपरनिकस जलवायु परिवर्तन सेवा के अनुसार 1980 के दशक से यूरोप वैश्विक औसत की तुलना में दोगुनी से अधिक गति से गर्म हुआ है। वैज्ञानिकों का कहना है कि मानव-जनित ताप वृद्धि लंबे समय की गर्मी और उससे जुड़े सूखे को अधिक बार और अधिक तीव्र बना रही है। नए अलर्ट बताते हैं कि तत्काल स्वास्थ्य खतरे को संभालने के साथ बिजली ग्रिड, जलमार्ग, परिवहन और पर्यटन स्थलों को लगातार कठोर होती गर्मियों के अनुकूल बनाना आवश्यक है।
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