ब्रिटेन को लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे के विस्तार की मंजूरी देने से पहले विमानन उत्सर्जन के नियम कड़े करने होंगे। जलवायु परिवर्तन समिति ने 16 सितंबर को अपनी नई सलाह में कहा कि मौजूदा नीतियों से परियोजना और ब्रिटेन के 2050 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन के लक्ष्य के बीच तालमेल संभव नहीं है।
सरकार ने प्रस्तावित हीथ्रो विस्तार नीति का यह आकलन मांगा था। रॉयटर्स के अनुसार, लेबर सरकार ने आर्थिक वृद्धि के लिए पिछले वर्ष तीसरे रनवे का समर्थन किया था। समिति का कहना है कि कानून विमानन को 2050 तक सभी उत्सर्जन का समाधान करने के लिए बाध्य करे, चाहे सीधे कटौती से या तकनीक से कार्बन हटाकर।
समिति के अनुसार, ब्रिटेन का विमानन उत्सर्जन 1990 से दोगुने से अधिक हो गया, जबकि पूरी अर्थव्यवस्था का उत्सर्जन आधा हुआ है। देश के विमानन उत्सर्जन में हीथ्रो की हिस्सेदारी लगभग आधी है। रिपोर्ट के मुताबिक विस्तार के बिना भी मौजूदा नीतियों से 2050 तक इस क्षेत्र का उत्सर्जन नहीं घटेगा।
समिति चाहती है कि उत्सर्जन घटाने की लागत हवाई किरायों में जुड़े। इससे टिकाऊ विमानन ईंधन और तकनीकी कार्बन निष्कासन को धन मिलेगा तथा मांग की वृद्धि धीमी होगी। रॉयटर्स के अनुसार, ऐसे ईंधन की वैश्विक विमानन ईंधन खपत में हिस्सेदारी अभी 1% से कम है और इसकी लागत पारंपरिक जेट ईंधन से कई गुना अधिक है।
हीथ्रो का कहना है कि विस्तार से आर्थिक वृद्धि और 2050 की शुद्ध शून्य प्रतिबद्धता, दोनों संभव हैं। उसकी वेबसाइट के अनुसार, एयरलाइनों को टिकाऊ ईंधन की अतिरिक्त लागत चुकाने में मदद के लिए 2026 में आठ करोड़ पाउंड से अधिक रखे गए हैं। इस वर्ष उसका लक्ष्य 5.6% हिस्सेदारी है, जबकि ब्रिटेन में अनिवार्य स्तर 3.6% है।
रॉयटर्स के अनुसार, समिति ने 25 वर्षीय शुद्ध शून्य विमानन रणनीति, कार्बन घटाने की लागत धीरे-धीरे एयरलाइनों पर डालने और प्रमुख तकनीकों का पर्याप्त विस्तार न होने पर वैकल्पिक योजनाओं की मांग की। रिपोर्ट ने विस्तार नीति की जलवायु कसौटी में स्पष्ट रूप से 2050 का लक्ष्य और 2054 में पूरा होने वाला समूचा विस्तार शामिल करने की भी सिफारिश की।
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