जी7 ने ऊर्जा कीमतों का दबाव घटाने के लिए चार महीने में तेल और ईंधन भंडार से 10 करोड़ बैरल जारी करने पर सहमति जताई है। योजना को 2 अक्टूबर की ऑनलाइन बैठक में मंजूरी मिली और ले मोंद ने 3 अक्टूबर को इसकी खबर दी। अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (आईईए) के समन्वय में पहले बीस दिनों में डीजल की बड़ी मात्रा उपलब्ध कराई जाएगी।
नेताओं का बयान इस कदम को मार्च की प्रतिबद्धताओं के क्रियान्वयन से जोड़ता है और पहले दी गई मात्रा को ध्यान में रखता है। वह पूरी मात्रा को पुराने कार्यक्रम से अलग अतिरिक्त आवंटन नहीं बताता। रॉयटर्स के अनुसार, समझौते में देशों के आधार पर या कच्चे तेल, डीजल और अन्य उत्पादों के बीच मात्रा का ब्योरा नहीं दिया गया है।
आईईए प्रमुख फातिह बिरोल ने कहा कि 11 मार्च को घोषित 40 करोड़ बैरल में से करीब 32.5 करोड़ बैरल पहले ही जारी हो चुके हैं। एजेंसी के अनुसार, मध्य पूर्व का कच्चे तेल का निर्यात काफी सुधरा है, लेकिन परिष्कृत ईंधन का प्रवाह अब भी बहुत सीमित है। बिरोल ने कहा कि रूसी रिफाइनरियों पर यूक्रेनी हमलों से डीजल बाजार का दबाव बढ़ा है।
जी7 सदस्यों ने एक-दूसरे को ऊर्जा निर्यात पर रोक से बचने का भी वादा किया और अन्य उत्पादकों से प्रतिबंध न लगाने को कहा। रॉयटर्स के अनुसार, वाशिंगटन यूरोप पर डीजल भंडार जारी करने का दबाव डालते समय अमेरिकी निर्यात पर रोक पर भी विचार कर रहा था। इससे यूरोप की आपूर्ति घटने का जोखिम था, जो अमेरिकी डीजल पर अधिक निर्भर हो गया है।
उत्पादन बढ़ाने के लिए नेता रिफाइनरियों की मरम्मत के कार्यक्रमों में समन्वय करेंगे, ताकि वे एक साथ बंद न हों, और जहां संभव हो वहां उपयोग दर अस्थायी रूप से बढ़ाएंगे। उन्होंने बड़ी शोधन क्षमता वाले देशों से सहयोग को भी प्रोत्साहित किया। घोषित उद्देश्य परिवारों और कंपनियों को कीमतों के झटकों से बचाना और ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना है।
जी7 ने आईईए से आपूर्ति और बाजार पर असर की निगरानी तथा बीस दिनों में अनुवर्ती रिपोर्ट मांगी है, जिसमें भंडार दोबारा भरने की सिफारिशें होंगी। सदस्य जरूरत पड़ने पर और डीजल जारी करने के बारे में एजेंसी के माध्यम से चर्चा करेंगे। बयान आपूर्ति का समय तय करता है, लेकिन ईंधन की कीमतों में किसी निश्चित गिरावट की गारंटी नहीं देता।
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