ओहायो स्टेट यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने एक ऐसे आणविक मार्ग की पहचान की है जो ग्लियोब्लास्टोमा को विकिरण का प्रतिरोध करने और ट्यूमर की वृद्धि बनाए रखने में मदद कर सकता है। रविवार को सामने लाई गई जानकारी के अनुसार, टीम ने पाया कि SET, ANP32A और CIP2A नामक तीन प्रोटीन प्रोटीन फॉस्फेटेज 2A या PP2A को दबाते हैं। यह एंजाइम सामान्यतः कैंसर बढ़ाने वाले कई संकेतों को नियंत्रित करता है। ये निष्कर्ष प्रीक्लिनिकल हैं और मरीजों के लिए उपचार सिद्ध नहीं करते।
ग्लियोब्लास्टोमा वयस्कों में सबसे आम प्राथमिक मस्तिष्क कैंसर है और अत्यंत आक्रामक होता है। सर्जरी, विकिरण और कीमोथेरेपी मानक देखभाल हैं, फिर भी ट्यूमर अक्सर लौट आता है क्योंकि उसकी कोशिकाएं उपचार के अनुकूल होकर क्षति की मरम्मत करती हैं। मई 2026 में सहकर्मी-समीक्षित पत्रिका Cancer Letters में प्रकाशित अध्ययन ने पूछा कि ट्यूमर वृद्धि से जुड़े काइनेज नेटवर्क को सक्रिय कैसे रखता है, जबकि ट्यूमर दबाने वाला PP2A एंजाइम आनुवंशिक रूप से सही रहता है।
वैज्ञानिकों ने सामान्य मस्तिष्क और ग्लियोब्लास्टोमा ऊतक के सार्वजनिक आरएनए तथा प्रोटीन आंकड़ों का विश्लेषण किया, मरीजों के नमूने जांचे और स्थापित एवं मरीजों से प्राप्त कैंसर कोशिका पंक्तियों का इस्तेमाल किया। ट्यूमर में SET, ANP32A और CIP2A का स्तर अधिक मिला। CRISPR-Cas9 जीन संपादन से हर अवरोधक को हटाने पर PP2A गतिविधि के संकेत बढ़े, जिससे पता चलता है कि ये प्रोटीन घातक संकेत व्यवस्था को एंजाइम से बचाते हैं।
चूहों के प्रयोगों में SET रहित कोशिकाओं ने 100 दिनों की निगरानी के दौरान पता लगाने योग्य मस्तिष्क ट्यूमर नहीं बनाए, जबकि ANP32A या CIP2A हटाने से जीवनकाल में अपेक्षाकृत छोटी वृद्धि हुई। अवरोधकों को निष्क्रिय करने पर ग्लियोब्लास्टोमा कोशिकाएं विकिरण के प्रति अधिक संवेदनशील भी हुईं, क्योंकि डीएनए क्षति की मरम्मत और कोशिका-चक्र जांच नियंत्रित करने वाले ATM तथा ATR मार्ग कमजोर पड़े। ये प्रयोग प्रयोगशाला मॉडल पर हुए, मनुष्यों पर नहीं।
निष्कर्ष संकेत देते हैं कि प्राकृतिक अवरोधकों को निशाना बनाकर PP2A गतिविधि बहाल करने से ट्यूमर को सहारा देने वाले कई मार्ग एक साथ प्रभावित हो सकते हैं और विकिरण चिकित्सा मजबूत हो सकती है। शोधकर्ताओं ने ट्यूमर बनने में SET को महत्वपूर्ण बताया और डीएनए क्षति प्रतिक्रिया बदलने के लिए CIP2A को संभावित लक्ष्य माना। फिर भी PP2A कई कोशिकीय लक्ष्यों पर काम करता है, इसलिए सुरक्षा, चयनात्मकता और स्वस्थ ऊतक पर असर का सावधानी से परीक्षण जरूरी है।
लेखकों ने कहा कि यह काम इस मार्ग को प्रभावित करने वाली दवाओं के मूल्यांकन की पहली सीढ़ी है। अध्ययन में जांची गई कोई दवा ग्लियोब्लास्टोमा उपचार के रूप में स्वीकृत नहीं है और शोधकर्ताओं ने नैदानिक परीक्षणों के बाहर ऐसे यौगिकों के उपयोग से मना किया है। मानव परीक्षण से पहले दूसरे मॉडलों में पुष्टि, सर्वोत्तम चिकित्सीय लक्ष्य का चयन और सुरक्षा स्थापित करना आवश्यक होगा; तभी यह देखा जा सकेगा कि तरीका मरीजों के परिणाम सुधारता है या नहीं।
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