दुनिया के महासागर का केवल 3.5 प्रतिशत हिस्सा प्रभावी रूप से संरक्षित माना जाता है, जबकि लगभग 10 प्रतिशत क्षेत्र संरक्षण के लिए नामित है। यह निष्कर्ष 23 सितंबर को Together for the Ocean की प्रकाशित रिपोर्ट में सामने आया। रिपोर्ट के अनुसार मौजूदा संकल्प पूरे होने पर भी 2030 तक नामित क्षेत्र लगभग 12 प्रतिशत तक ही पहुंचेंगे, जबकि अंतरराष्ट्रीय लक्ष्य कम से कम 30 प्रतिशत समुद्र की रक्षा और संरक्षण का है। यह अंतर आगामी वैश्विक जैव विविधता वार्ता का अहम विषय बनेगा।
लगभग 200 देशों ने 2022 में कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचे के तहत 30 प्रतिशत का लक्ष्य स्वीकार किया था। Systemiq ने संरक्षण संगठनों के साथ तैयार नई रिपोर्ट में संरक्षित क्षेत्र घोषित करने और उन्हें प्रभावी ढंग से संचालित करने के बीच फर्क जांचा। रॉयटर्स के अनुसार साथ में जारी वैश्विक आकलन बताता है कि भूमि और अंतर्देशीय जल का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा औपचारिक संरक्षण या संरक्षण उपायों के अंतर्गत आता है।
रिपोर्ट प्रभावी संरक्षण का अनुमान लगाने के लिए पूर्ण या उच्च स्तर पर संरक्षित क्षेत्रों को संकेतक मानती है। इसके अनुसार लक्ष्यों में गिने गए कुछ क्षेत्रों में समुद्र तल पर जाल घसीटकर मछली पकड़ने जैसी हानिकारक गतिविधियां अब भी संभव हैं। लगभग 33 प्रतिशत मैंग्रोव नामित क्षेत्रों में हैं, लेकिन केवल 0.3 प्रतिशत को पूर्ण या उच्च संरक्षण मिला है। समुद्री घास के लिए संबंधित आंकड़े 34 प्रतिशत और 1.1 प्रतिशत हैं। ये आंकड़े संरक्षण की स्थिति बताते हैं, हर पारिस्थितिकी तंत्र की वास्तविक दशा का सीधा माप नहीं हैं।
वित्तीय संसाधनों में भी बड़ी कमी है। रिपोर्ट के अनुसार समुद्री लक्ष्य पूरा करने के लिए सालाना करीब 16 अरब डॉलर चाहिए, जबकि मौजूदा खर्च लगभग 1.8 अरब डॉलर है। करीब आधे तटीय देशों के पास समय सीमा और संख्या के साथ तय राष्ट्रीय समुद्री लक्ष्य है। मौजूदा संकल्प पूरी तरह लागू हो जाएं, तब भी 2030 के नामित क्षेत्र के लक्ष्य से महासागर का अधिकांश हिस्सा बाहर रहेगा।
ये निष्कर्ष संयुक्त राष्ट्र के जैव विविधता सम्मेलन से पहले आए हैं, जो 19 अक्टूबर को आर्मेनिया के येरेवान में शुरू होगा। रिपोर्ट मजबूत राष्ट्रीय योजनाओं, नियमित वित्तपोषण, निगरानी और नियम लागू करने के साथ राष्ट्रीय अधिकार क्षेत्र से बाहर के समुद्र की रक्षा के लिए हाई सीज संधि का उपयोग सुझाती है। जैव विविधता अभिसमय ने अलग प्रारूप समीक्षा में कहा है कि ढांचे के लक्ष्य पाने के लिए अमल की गति बढ़ानी होगी।
सरकारों को तय करना होगा कि घोषित क्षेत्रों में टिकाऊ सुरक्षा कैसे सुनिश्चित करें और क्या 2030 से पहले अपने संकल्प बढ़ाएं। 3.5 प्रतिशत का अनुमान प्रभावी संरक्षण की चुनी गई परिभाषा पर आधारित है। 12 प्रतिशत का अनुमान इस शर्त पर है कि देश मौजूदा वादे पूरे करें। संयुक्त राष्ट्र की आगामी समीक्षा देखेगी कि ये वादे ठोस कार्रवाई में कितना बदलते हैं।
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