चाइना पेट्रोलियम एंड केमिकल कॉरपोरेशन यानी सिनोपेक ने रविवार को बताया कि चीनी लेखा मानकों के तहत पहली छमाही का शुद्ध लाभ सालाना 19.3% बढ़कर 25.63 अरब युआन, लगभग 3.81 अरब डॉलर, हो गया। घरेलू ईंधन मांग में कमजोरी, तेल कीमतों में अस्थिरता और पश्चिम एशिया से आपूर्ति में बाधा के बावजूद यह नतीजा आया, इसलिए दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनर के लिए इसे कारोबारी मजबूती की महत्वपूर्ण परीक्षा माना जा रहा है।
कंपनी के अंतरिम बयान के अनुसार जून तक छह महीनों में राजस्व 2.0% बढ़कर 1.44 लाख करोड़ युआन और परिचालन नकदी प्रवाह 2.4% बढ़कर 62.50 अरब युआन रहा। अंतरराष्ट्रीय लेखा मानकों के तहत शेयरधारकों के हिस्से का लाभ 11.9% बढ़कर 26.57 अरब युआन हुआ; दोनों आंकड़ों का अंतर अलग-अलग वित्तीय रिपोर्टिंग प्रणालियों के कारण है।
सिनोपेक ने 113.31 मिलियन टन कच्चा तेल प्रसंस्कृत किया, जो करीब 4.57 मिलियन बैरल प्रतिदिन और पिछले साल से 5.6% कम है। कंपनी ने कहा कि ऊंची कीमतों और नई ऊर्जा विकल्पों के विस्तार के कारण चीन में परिष्कृत ईंधन की खपत 8.6% घटी; पेट्रोल की मांग 7.9% और डीजल की 11.5% कम हुई, जबकि विमान ईंधन की खपत 1.3% बढ़ी।
फिर भी रिफाइनिंग कारोबार ने सबसे बड़ा सुधार दिया। पश्चिम एशिया के बाहर से खरीद बढ़ाने, खरीद का समय बदलने और अधिक लाभकारी उत्पादों पर उत्पादन केंद्रित करने से इसका परिचालन लाभ 381.5% उछलकर 17.0 अरब युआन हो गया। रिफाइनिंग मार्जिन 44.1% बढ़कर 453 युआन प्रति टन रहा, हालांकि तेल और ईंधन मूल्य की अस्थिरता के कारण समूह ने परिसंपत्ति मूल्य में कमी के लिए 16 अरब युआन का प्रावधान भी किया।
आंकड़े दिखाते हैं कि आपूर्ति और उत्पाद मिश्रण के फैसलों ने पश्चिम एशिया पर निर्भरता को आंशिक रूप से संतुलित किया, जहां से सिनोपेक सामान्यतः अपनी करीब आधी कच्चे तेल की जरूरत पूरी करती है। ऊंची तेल कीमतों से खोज और उत्पादन का परिचालन लाभ 21.5% बढ़कर 28.7 अरब युआन हुआ, लेकिन अधिक क्षमता और कमजोर मांग के कारण रसायन विभाग घाटे में रहा, हालांकि उसका नुकसान काफी घट गया।
बोर्ड ने 0.105 युआन प्रति शेयर अंतरिम लाभांश मंजूर किया, जो चीनी मानकों के तहत 49.5% भुगतान अनुपात है, और शेयर पुनर्खरीद का नया दौर शुरू किया। जुलाई से दिसंबर के लिए कंपनी ने लगभग 113 मिलियन टन कच्चा तेल प्रसंस्करण का अनुमान दिया है, जो पहली छमाही के करीब है; इसलिए मांग, तेल कीमतों का उतार-चढ़ाव और आपूर्ति सुरक्षा शेष 2026 के प्रमुख कारक रहेंगे।
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