संयुक्त राष्ट्र ने बुधवार को ब्राजील, साहेल क्षेत्र और सऊदी अरब के तीन पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्बहाली कार्यक्रमों को विश्व पुनर्बहाली प्रमुख पहल के रूप में मान्यता दी। इन परियोजनाओं का संयुक्त लक्ष्य 2030 तक लगभग 50 लाख हेक्टेयर भूमि को फिर से स्वस्थ बनाना है। पुरस्कार मंगोलिया की राजधानी उलानबटार में मरुस्थलीकरण से निपटने संबंधी संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन की कॉप17 बैठक में दिए गए, जहां सरकारें खराब भूमि, सूखे, खाद्य आपूर्ति और आर्थिक स्थिरता के बीच संबंधों पर विचार कर रही हैं।
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम और संयुक्त राष्ट्र खाद्य एवं कृषि संगठन 2021 से 2030 तक चल रहे पारिस्थितिकी तंत्र पुनर्बहाली दशक के तहत इन पुरस्कारों का संयुक्त नेतृत्व करते हैं। पर्यावरण कार्यक्रम के अनुसार, ये तीनों योजनाएं इस दशक में एक अरब हेक्टेयर भूमि बहाल करने की अंतरराष्ट्रीय प्रतिज्ञा में योगदान देती हैं। इनके जुड़ने से सम्मानित पहलों की संख्या 24 से बढ़कर 27 हो गई है और एक अंतरराष्ट्रीय निगरानी ढांचा उनकी प्रगति को पारदर्शी रूप से दर्ज करेगा।
ब्राजील में अरातिकुम पहल नौ राज्यों में 180 से अधिक संगठनों, मूल निवासियों, स्थानीय समुदायों, किसानों, शोधकर्ताओं और सरकारी संस्थानों को जोड़कर सेराडो सवाना को बहाल कर रही है। जून 2026 तक 27,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर काम हो चुका था और 150 से अधिक देशी पौधों की प्रजातियों से एकत्र बीज इस्तेमाल किए गए थे। प्राकृतिक पुनर्जनन, सीधी बुवाई और कृषि वानिकी के जरिए 2030 तक 20 लाख हेक्टेयर तक पहुंचने का लक्ष्य है।
संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के अनुसार, सऊदी अरब के राष्ट्रीय हरित कार्यक्रम ने जून तक 10 लाख हेक्टेयर को पुनर्बहाली के दायरे में लिया और 15.9 करोड़ पेड़ लगाए थे। इसके 2030 लक्ष्यों में 25 लाख हेक्टेयर भूमि बहाल करना, 21.5 करोड़ पेड़ लगाना और 1,87,000 तक रोजगार बनाना शामिल है। कार्यक्रम रेगिस्तान, जंगल, चरागाह, शहर और तटीय क्षेत्रों में वनीकरण, नियंत्रित चराई, देशी वन्यजीवों की वापसी, वर्षाजल संग्रह और शोधित अपशिष्ट जल का उपयोग करता है।
साहेल एकीकृत लचीलापन पहल बुर्किना फासो, चाड, माली, मॉरिटानिया और नाइजर में काम करती है, जहां संघर्ष और जलवायु दबाव भूमि क्षरण और खाद्य असुरक्षा को गंभीर बनाते हैं। विश्व खाद्य कार्यक्रम के नेतृत्व वाली योजना ने जून तक 3,35,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि बहाल की थी और 2030 तक 4,70,000 हेक्टेयर का लक्ष्य रखा है। मिट्टी और जल प्रबंधन, आजीविका सहायता तथा स्कूली भोजन के मेल से 40 लाख से अधिक लोगों को लाभ हुआ है, जिनमें सूडान से आए शरणार्थी भी हैं।
पर्यावरण कार्यक्रम की प्रमुख इंगर एंडरसन ने कहा कि स्वस्थ भूमि खाद्य प्रणालियों को जलवायु परिवर्तन, सूखे, मरुस्थलीकरण और भू-राजनीतिक तनावों से बचा सकती है। खाद्य एवं कृषि संगठन के महानिदेशक क्यू डोंग्यू ने पुनर्बहाली को खाद्य सुरक्षा, जैव विविधता और भूमि संबंधी लक्ष्यों से जोड़ा। संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन के अनुसार भूमि क्षरण दुनिया की 40 प्रतिशत तक भूमि को पहले ही प्रभावित करता है। कॉप17 की बैठक 28 अगस्त तक चलेगी और 197 पक्षों के प्रतिनिधि सफल तरीकों के वित्तपोषण तथा विस्तार पर चर्चा करेंगे।
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