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अमेरिका और ईरान दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमत, होर्मुज जलडमरूमध्य फिर से खुलेगा

प्रकाशित 8 अप्रैल 2026 819 दृश्य

संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान ने सोमवार को दो सप्ताह के एक नाटकीय युद्धविराम समझौते पर सहमति व्यक्त की, जो राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा ईरानी ठिकानों पर बड़े सैन्य हमले की समय सीमा से मुश्किल से एक घंटा पहले हुआ। यह समझौता पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ़ और फ़ील्ड मार्शल आसिम मुनीर की सक्रिय मध्यस्थता से संभव हुआ और 39 दिन पहले शुरू हुई शत्रुता के बाद पहली महत्वपूर्ण तनाव कमी का प्रतिनिधित्व करता है। समझौते की शर्तों के अनुसार, ईरान अस्थायी रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलेगा, हालाँकि इस रणनीतिक जलमार्ग से गुज़रने वाले सभी जहाज़ों को ईरानी सशस्त्र बलों के साथ अपने मार्ग का समन्वय करना होगा।

राष्ट्रपति ट्रंप ने ट्रुथ सोशल पर युद्धविराम की घोषणा करते हुए कहा कि उन्होंने होर्मुज जलडमरूमध्य के पूर्ण, तत्काल और सुरक्षित उद्घाटन की शर्त पर बमबारी रोकने पर सहमति दी है। उन्होंने यह भी दावा किया कि अमेरिकी सेना ने अभियान के दौरान निर्धारित सभी सैन्य उद्देश्यों को पहले ही पूरा कर लिया है और उनसे भी आगे निकल गई है। इस बयान में विजयी स्वर स्पष्ट था, जिसमें समझौते को भारी सैन्य शक्ति और कूटनीतिक दबाव के माध्यम से हासिल की गई निर्णायक अमेरिकी जीत के रूप में प्रस्तुत किया गया।

ईरान ने अपनी ओर से दस सूत्रीय एक महत्वाकांक्षी प्रस्ताव प्रस्तुत किया जिसमें क्षेत्रीय सैन्य अड्डों से सभी अमेरिकी सेनाओं की वापसी, तेहरान पर लगाए गए सभी अमेरिकी प्रतिबंधों को हटाना, अरबों डॉलर की जब्त ईरानी संपत्तियों को मुक्त करना, युद्ध क्षतिपूर्ति का भुगतान और जलडमरूमध्य से भविष्य में आवागमन के लिए एक औपचारिक प्रोटोकॉल शामिल है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने दृढ़ता से जवाब देते हुए कहा कि ईरान द्वारा सभी संवर्धित यूरेनियम की सुपुर्दगी किसी भी स्थायी समझौते के लिए गैर-परक्राम्य शर्त बनी हुई है। दोनों पक्षों ने सार्वजनिक रूप से इस टकराव में विजय का दावा किया।

पाकिस्तान ने दोनों देशों के प्रतिनिधिमंडलों को शुक्रवार 10 अप्रैल से शुरू होने वाली औपचारिक वार्ता के लिए इस्लामाबाद आमंत्रित किया है। उपराष्ट्रपति जे.डी. वेंस के अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने की उम्मीद है, जो इन वार्ताओं को वाशिंगटन द्वारा दी जा रही अत्यधिक महत्ता को दर्शाता है। पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका को अंतर्राष्ट्रीय पर्यवेक्षकों ने सराहा है, क्योंकि इस्लामाबाद ने तेहरान और वाशिंगटन दोनों के साथ अपने संबंधों का लाभ उठाकर पक्षों को एक निर्णायक मोड़ पर वार्ता की मेज़ पर लाने में सफलता प्राप्त की।

इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने युद्धविराम के प्रति समर्थन व्यक्त करते हुए एक बयान जारी किया, लेकिन इस बात पर ज़ोर दिया कि यह समझौता लेबनान में चल रहे इज़रायली सैन्य अभियानों पर लागू नहीं होता। यह भेद व्यापक क्षेत्रीय जटिलता को उजागर करता है, क्योंकि अमेरिका-ईरान टकराव के रुकने के बावजूद अनेक परस्पर जुड़े संघर्ष मध्य पूर्व को अस्थिर करना जारी रखे हुए हैं।

पोप लियो चौदहवें ने वेटिकन से हस्तक्षेप करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप की पूर्व धमकी की निंदा की जिसमें उन्होंने कहा था कि एक पूरी सभ्यता नष्ट हो जाएगी, और इसे एक विश्व नेता की ओर से सर्वथा अस्वीकार्य भाषा बताया। परमधर्मपीठाध्यक्ष ने सभी पक्षों से थकान या सामरिक गणना से प्रेरित अस्थायी युद्धविरामों के बजाय सच्ची शांति की खोज करने का आह्वान किया। उनके शब्दों ने यूरोप और वैश्विक दक्षिण में गहरी गूँज पैदा की जहाँ इस संघर्ष का विरोध विशेष रूप से तीव्र रहा है।

दो सप्ताह की युद्धविराम अवधि अब वार्ताकारों पर शत्रुता के संभावित पुनः शुरू होने से पहले स्थायी शांति का ढाँचा तैयार करने का भारी दबाव डालती है। विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि परमाणु निरस्त्रीकरण की अमेरिकी माँगों और संप्रभुता तथा क्षतिपूर्ति पर ईरान के आग्रह के बीच की खाई अभी भी बहुत गहरी है। इस्लामाबाद में आने वाले दिन यह तय करेंगे कि क्या यह नाज़ुक समझौता किसी अधिक टिकाऊ रूप में विकसित हो सकता है, या यह इक्कीसवीं सदी के सबसे ख़तरनाक सैन्य टकरावों में से एक में अगले बढ़ाव से पहले केवल एक संक्षिप्त विराम है।

स्रोत: CNN, NBC News, Al Jazeera, CNBC, NPR, CBS News, Axios

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