इज़राइल में अमेरिका के राजदूत माइक हकाबी ने गुरुवार को उन इज़राइली बसने वालों की कड़ी निंदा की, जिन्होंने कब्ज़े वाले वेस्ट बैंक के कुसरा में तीन फ़लस्तीनी घरों को पाँच रात तक घेर रखा था। एसोसिएटेड प्रेस द्वारा उद्धृत निवासियों और स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, भोजन और पानी घटने के बावजूद परिवार सुरक्षित रूप से बाहर नहीं निकल पा रहे थे। हकाबी ने इस डराने की कार्रवाई को आतंक का कृत्य बताया और कहा कि अमेरिकी दूतावास ने इज़राइली सेना तथा पुलिस के साथ समन्वय किया है।
इनमें से एक घर ओहायो में रहने वाले फ़लस्तीनी अमेरिकी लुई रिदी का है। उनके भाई कुसाई अबू रिदा अपने किशोर बेटे के साथ संपत्ति की रक्षा के लिए भीतर रहे, जबकि बाहर कभी-कभी दर्जनों लोगों के समूह जमा हुए, तंबू लगाए और कथित रूप से पत्थर फेंके। अबू रिदा ने कहा कि बिजली और पानी काट दिए गए थे, इसलिए पिता-पुत्र को कुएँ का पानी पीना पड़ा। उधर, रिदी ने अमेरिका से सुरक्षा कैमरों और टेलीफ़ोन पर मिलने वाली जानकारी के माध्यम से घटनाक्रम देखा।
एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, इज़राइली सैनिकों ने व्यवस्था बहाल करने की कोशिश की। गुरुवार सुबह सेना अबू रिदा और उनके बेटे को दूसरे घर में ले गई, लेकिन वे तब भी इलाका नहीं छोड़ सकते थे। एल पाइस ने बताया कि हकाबी के अनुसार सैनिक और पुलिस दूतावास के अनुरोध पर कुसरा पहुँचे। राजदूत ने कहा कि अमेरिकी अधिकारी दोनों सेवाओं के साथ काम जारी रखे हुए हैं, हालांकि उपलब्ध रिपोर्टों में किसी गिरफ्तारी या घेराबंदी के पूरी तरह समाप्त होने की घोषणा नहीं हुई।
हकाबी की भाषा ऐसे राजदूत की ओर से असामान्य रूप से तीखी फटकार थी, जो लंबे समय से इज़राइली बस्तियों का समर्थक रहा है। उन्होंने जिम्मेदार लोगों को आतंकवादी बताया और परिवार को डराने तथा परेशान करने के प्रयास को घृणित कहा। यह हस्तक्षेप इसलिए भी उल्लेखनीय है क्योंकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में हिंसा के आरोपी बसने वालों पर बाइडन प्रशासन के प्रतिबंध हटा दिए थे, जबकि हकाबी ने हाल में बढ़ते हमलों की निंदा की है।
नब्लुस के दक्षिण में स्थित कुसरा बसने वालों की हिंसा का प्रमुख केंद्र बन गया है। संयुक्त राष्ट्र के मानवीय कार्यालय ने अप्रैल में कहा था कि उसने 2026 में वेस्ट बैंक के किसी भी अन्य समुदाय की तुलना में कुसरा में अधिक ऐसे हमले दर्ज किए। एसोसिएटेड प्रेस द्वारा उद्धृत संयुक्त राष्ट्र की जानकारी के अनुसार, मार्च में ड्यूटी से बाहर एक इज़राइली रिज़र्व सैनिक की गोली से 25 वर्षीय निवासी की मौत हुई और हमलों में आठ अन्य लोग घायल हुए। पिछले महीने पास के एक गाँव में हिंसा से दो इज़राइली और चार फ़लस्तीनी मारे गए, जिसके बाद हमलावरों ने कुसरा की एक मस्जिद में आग लगा दी और दीवार पर बदला लेने का संदेश लिखा।
इज़राइल ने 1967 के मध्य पूर्व युद्ध में वेस्ट बैंक पर नियंत्रण किया था और फ़लस्तीनी इस क्षेत्र को अपने भावी राष्ट्र का मुख्य भाग बनाना चाहते हैं। अब तात्कालिक परीक्षा यह है कि क्या इज़राइली अधिकारी तीनों परिवारों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित कर सकते हैं, घरों को घेरने वालों को हटा सकते हैं और कथित हिंसा की जाँच कर सकते हैं। दूतावास की भागीदारी स्पष्ट जवाबदेही के लिए राजनयिक दबाव बढ़ाती है, जबकि किसी समाधान की सूचना न होने के कारण निवासियों की सुरक्षा और पुलिस की प्रतिक्रिया अगले महत्वपूर्ण घटनाक्रम बने हुए हैं।
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