बांग्लादेश ने शनिवार, 26 सितंबर को खसरा और रूबेला के खिलाफ देशव्यापी पूरक टीकाकरण अभियान शुरू किया। गंभीर प्रकोप के बीच इसका लक्ष्य 34 लाख बच्चों को टीका देना है। बीडीन्यूज24 और ढाका ट्रिब्यून के अनुसार स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री सरदार मोहम्मद सखावत हुसैन ने ढाका में अभियान का उद्घाटन किया। इसमें छह से 59 महीने के वे बच्चे शामिल हैं जिन्हें पहले की खुराक नहीं मिली थी, साथ ही वे शिशु भी जो हाल में आपात अभियान के लिए निर्धारित आयु तक पहुंचे हैं।
नया चरण अप्रैल में शुरू हुए बड़े टीकाकरण कार्यक्रमों के बाद आया है, जो हर बच्चे तक नहीं पहुंच पाए। मंत्री के अनुसार लक्ष्य में पहले छूटे 24 लाख बच्चे और हाल ही में छह महीने के हुए लगभग 10 लाख शिशु शामिल हैं। अभियान 31 अक्टूबर तक चलने वाला है। स्थानीय समाचार संस्थानों ने बताया कि कामकाजी परिवारों की सुविधा के लिए टीकाकरण केंद्र छुट्टियों और शाम के समय भी खुलेंगे।
रॉयटर्स ने सरकारी आंकड़ों के आधार पर बताया कि खसरे से जुड़ी 1,087 संदिग्ध या पुष्ट मौतें दर्ज हुई थीं, जिनमें प्रयोगशाला से पुष्टि की गई 101 मौतें शामिल थीं। एजेंसी के अनुसार 15 मार्च से अधिकारियों ने लगभग 1,87,000 संदिग्ध संक्रमण और 21,099 पुष्ट मामले दर्ज किए। संदिग्ध और पुष्ट आंकड़ों की जांच का स्तर अलग है, इसलिए उन्हें एक समान नहीं समझना चाहिए। रॉयटर्स ने बताया कि अस्पताल डेंगू के मौसमी बढ़ाव का दबाव भी झेल रहे हैं।
मंत्री ने कहा कि खसरा-रूबेला टीकाकरण के पहले चरणों में करीब एक करोड़ 85 लाख बच्चों को खुराक मिली। बीडीन्यूज24 के अनुसार बाद की कार्रवाई में 14 लाख और बच्चों को खोजकर टीका लगाया गया, फिर भी संक्रमण जारी रहा। यूनिसेफ ने नए अभियान के लिए खुराकें उपलब्ध कराईं और स्थानीय अधिकारी तथा स्वास्थ्यकर्मी केंद्रों का संचालन कर रहे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन के एक प्रतिनिधि ने कहा कि लक्ष्य पूरा करने के लिए प्रतिदिन एक लाख से अधिक बच्चों को टीका लगाना होगा।
रॉयटर्स के अनुसार 2024 और 2025 में नियमित टीकाकरण में बाधा, टीकों की आपूर्ति की समस्याएं और टले हुए अभियानों ने सुरक्षा में अंतर पैदा किया और प्रकोप को गंभीर बनाया। खसरा अत्यंत संक्रामक है और बिना टीका लगे छोटे बच्चों को विशेष जोखिम रहता है। एजेंसी ने बताया कि इस आपात अभियान की न्यूनतम आयु छह महीने है, जबकि सामान्य खसरा टीकाकरण नौ महीने की उम्र से शुरू होता है।
बीडीन्यूज24 के अनुसार स्वास्थ्य अधिकारियों, विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ की संयुक्त टीमें 4 से 14 अक्टूबर तक देश के आठों प्रशासनिक क्षेत्रों में काम की समीक्षा करेंगी। तत्काल चुनौती पहले छूटे बच्चों को ढूंढ़ना और 31 अक्टूबर तक उन्हें खुराक देना है। अधिकारियों का कहना है कि इन कमियों को दूर करना आगे के संक्रमण और मौतों को घटाने के लिए जरूरी है।
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