डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो में इबोला प्रकोप से कम से कम 2,011 लोगों की मौत हो चुकी है। सोमवार रात से मंगलवार सुबह के बीच जारी सरकारी आंकड़ों का हवाला देते हुए एसोसिएटेड प्रेस ने यह जानकारी दी। कुल 4,381 पुष्ट मामले दर्ज हुए हैं, जिससे यह देश का सबसे बड़ा और दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा दर्ज इबोला प्रकोप बन गया है। अधिकारियों और स्वास्थ्य एजेंसियों का कहना है कि संघर्ष प्रभावित और दूरदराज के पूर्वी प्रांतों में संक्रमण रोकथाम प्रयासों से तेज फैल रहा है।
सरकार ने 15 मई को प्रकोप घोषित किया था, हालांकि जीनोम अनुक्रमण से पता चला कि बुंडीबुग्यो वायरस फरवरी से फैल रहा था। एपी के अनुसार पहले पुष्ट मामले के बाद 2,000 मौतों तक पहुंचने की रफ्तार 2014 से 2016 के पश्चिम अफ्रीका प्रकोप की तुलना में लगभग तीन गुना रही। पहली 1,000 मौतें करीब नौ सप्ताह में हुईं, जबकि अगली 1,000 मौतें लगभग तीन सप्ताह में दर्ज की गईं।
मौजूदा प्रकोप में मामलों के मुकाबले मृत्यु दर 45.9 प्रतिशत है, जबकि पश्चिम अफ्रीका प्रकोप में यह 39.6 प्रतिशत थी। बुंडीबुग्यो इबोला वायरस का कम पाया जाने वाला प्रकार है और इसके लिए विशेष रूप से स्वीकृत कोई टीका या उपचार उपलब्ध नहीं है। प्रकोप के केंद्र इतुरी प्रांत में संभावित टीकों और उपचारों के नैदानिक परीक्षण शुरू हुए हैं, लेकिन नियमित नियंत्रण अभियान में ये उत्पाद अभी उपलब्ध नहीं हैं।
स्वास्थ्य दलों को विद्रोही हिंसा, खराब सड़कों, बाधित संचार और खनन, व्यापार तथा विस्थापन से जुड़े बड़े जन आवागमन का सामना करना पड़ रहा है। वेतन न मिलने के कारण कुछ कर्मचारियों ने काम रोक दिया है। एपी द्वारा उद्धृत विश्व स्वास्थ्य संगठन के आकलन के अनुसार कई नए संक्रमण निगरानी वाली संपर्क सूचियों के बाहर मिल रहे हैं। देर से सूचना और सहायक उपचार तक सीमित पहुंच मरीजों को जल्दी अलग रखने में बाधा डालती है और ऊंची मृत्यु दर में योगदान कर सकती है।
अधिकारियों ने सार्वजनिक सभाओं पर रोक लगाई और इतुरी का मुख्य हवाई अड्डा बंद किया है, फिर भी दक्षिण सूडान, युगांडा और रवांडा की सीमाओं के पास आवाजाही जारी है। इबोला संक्रमित व्यक्ति के रक्त या अन्य शारीरिक तरल पदार्थों अथवा दूषित वस्तुओं के सीधे संपर्क से फैलता है। डब्ल्यूएचओ ने मई में कांगो और युगांडा के बुंडीबुग्यो प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय चिंता वाली सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थिति घोषित किया था, जो व्यापक फैलाव के जोखिम और समन्वित कार्रवाई की जरूरत को दर्शाता है।
यह प्रकोप अब भी 2014 से 2016 के पश्चिम अफ्रीका प्रकोप से बहुत छोटा है, जिसमें 28,000 से अधिक मामले और 11,000 से ज्यादा मौतें हुई थीं, लेकिन इसकी गति अधिक है। अब कर्मचारियों को भुगतान और सुरक्षा देना, जांच तथा सुरक्षित देखभाल बढ़ाना, संपर्कों का पता लगाना और सामुदायिक सहयोग मजबूत करना तत्काल प्राथमिकताएं हैं। महामारी की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि ये उपाय संक्रमण की नई श्रृंखलाओं से पहले प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचते हैं या नहीं।
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