हाल की बारिश और ठंडे मौसम के बावजूद इंग्लैंड की 71 प्रतिशत भूमि अब भी सूखे की चपेट में है, जबकि जलाशयों में औसत भंडारण 60 प्रतिशत से नीचे आ गया है। ब्रिटेन की पर्यावरण एजेंसी ने 28 अगस्त को जारी साप्ताहिक आकलन में बताया कि 27 अगस्त तक इस महीने की वर्षा उस तारीख तक अपेक्षित दीर्घकालिक औसत की केवल 34 प्रतिशत रही। इससे जल आपूर्ति, नदियों और वन्यजीवों पर लगातार दबाव बना हुआ है।
एजेंसी के अनुसार, एक सप्ताह में जलाशयों का भंडार 2.7 प्रतिशत अंक और घटा तथा मौसमी औसत से 18 प्रतिशत से अधिक नीचे रहा। नौ बड़े जलाशयों में भंडारण असाधारण रूप से कम था, जो पिछले सप्ताह से दो अधिक हैं। निगरानी वाले आधे से अधिक नदी स्थलों पर प्रवाह उल्लेखनीय या असाधारण रूप से कम दर्ज हुआ। शुष्क मौसम लौटने पर हाल की बारिश से आया सुधार थोड़े समय का हो सकता है।
ब्रिस्टल वाटर द्वारा 27 अगस्त को अस्थायी प्रतिबंध लागू किए जाने के बाद अब लगभग तीन करोड़ लोगों के पानी के इस्तेमाल पर पाबंदियां हैं। दस आपूर्तिकर्ता अपने पूरे या आंशिक सेवा क्षेत्र में प्रतिबंध चला रहे हैं। नियामकों ने पानी निकालने के लाइसेंसों पर 1,412 सीमाएं भी गिनाईं, जबकि पूर्वी इंग्लैंड में फव्वारा सिंचाई की अनिवार्य कटौती और कई नदी घाटियों में स्वैच्छिक कटौती लागू है।
पर्यावरणीय नुकसान बढ़ रहा है। अधिकारियों ने पिछले सप्ताह सूखे और शुष्क मौसम से जुड़ी 40 अतिरिक्त घटनाएं दर्ज कीं, जिससे 2026 का कुल आंकड़ा 266 हो गया। इनमें शैवाल की 24 पुष्ट घटनाएं, मछलियों की मौत की 44 पुष्ट घटनाएं और पानी निकासी या कम प्रवाह से जुड़े 140 मामले शामिल हैं। कठोर मिट्टी जड़ वाली फसलों की कटाई कठिन बना रही है, जबकि कम पानी ने नौवहन सीमित किया और वाई नदी पर रॉस नौकायन प्रतियोगिता रद्द करवा दी।
बारिश ने स्वयं एक दूसरा खतरा भी पैदा किया और 27 अगस्त को 40 से अधिक बाढ़ चेतावनियां जारी की गईं। एजेंसी ने समझाया कि तेज वर्षा बहुत सूखी जमीन में समाने के बजाय उसके ऊपर बह सकती है, जिससे स्थानीय और थोड़े समय की बाढ़ आती है तथा प्रदूषक नदियों में पहुंचते हैं। किसानों को तरल खाद या अन्य जैविक उर्वरक फैलाने से पहले मिट्टी और मौसम की स्थिति जांचने की सलाह दी गई।
पर्यावरण एजेंसी ने घटना प्रबंधन व्यवस्था सक्रिय कर दी है और पर्यावरण निगरानी बढ़ाई है, जबकि राष्ट्रीय सूखा समूह हर सप्ताह बैठक कर रहा है। पहले के सरकारी आंकड़ों ने जुलाई को इंग्लैंड और वेल्स में 190 वर्षों का सबसे सूखा जुलाई बताया था और मौसम विभाग को व्यापक तथा लगातार बारिश की कोई स्पष्ट संभावना नहीं दिखी। अधिकारियों के अनुसार वास्तविक सुधार के लिए छिटपुट तेज बारिश नहीं, बल्कि लंबे समय की वर्षा जरूरी होगी।
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