फ्रांस ने 1900 में राष्ट्रीय माप शुरू होने के बाद अपनी सबसे गर्म मौसम-विज्ञान संबंधी गर्मी दर्ज की है, मेटेओ-फ्रांस ने 3 सितंबर को बताया। जून, जुलाई और अगस्त का औसत तापमान 24.0 डिग्री सेल्सियस रहा, जो 1991-2020 के सामान्य स्तर से 3.6 डिग्री अधिक था। यह 2003 और 2022 की असाधारण गर्मियों से भी काफी आगे है, जिनमें तापमान अंतर क्रमशः 2.7 और 2.3 डिग्री था।
राष्ट्रीय मौसम सेवा ने तीन लू अवधियां दर्ज कीं, जो मिलाकर 53 दिन चलीं। इससे पहले 2022 में सर्वाधिक 33 दिन दर्ज हुए थे। 17 से 30 जून की पहली लू 1947 के बाद मापी गई सबसे तीव्र लू थी। 24 जून को इसके चरम पर 72 विभाग सर्वोच्च लाल चेतावनी में थे और मुख्य भूमि फ्रांस के 40 प्रतिशत हिस्से में तापमान 40 डिग्री से ऊपर गया।
मुख्य निगरानी नेटवर्क के मौसम केंद्रों ने 178 बार कम से कम 40 डिग्री तापमान दर्ज किया, जो 2003 की 88 घटनाओं के दोगुने से अधिक है। स्ट्रासबर्ग, मेट्ज, अलेंसों, नोइरमूतिए, तार्ब और मारिन्यान ने पहली बार यह सीमा छुई। 24 और 25 जून को 30 डिग्री का राष्ट्रीय दैनिक औसत पूरे रिकॉर्ड में किसी भी दिन का सबसे ऊंचा स्तर था।
भीषण गर्मी के साथ देशभर में बारिश की करीब 40 प्रतिशत कमी रही, जिससे 1959 में वर्षा का रिकॉर्ड शुरू होने के बाद 2026 फ्रांस की दूसरी सबसे सूखी गर्मी बन गई। देश के बड़े हिस्से में सामान्य 20 से 30 दिनों के बजाय केवल 15 से 20 दिन बारिश हुई। अगस्त की शुरुआत में मिट्टी का औसत सूखापन अभूतपूर्व स्तर पर पहुंचा और महीने के अंत की बारिश ने केवल सीमित तथा असमान राहत दी।
सूखी वनस्पति, लगातार गर्मी और तेज हवा के दौर ने ब्रिटनी से कोर्सिका तक आग का खतरा बढ़ा दिया। मेटेओ-फ्रांस ने इसे रिकॉर्ड की सबसे गंभीर वनाग्नि ऋतु बताया। कुल 27 दिनों में कम से कम एक विभाग सर्वोच्च अग्नि-खतरे में रहा, जबकि लगातार 74 दिनों तक कम से कम एक विभाग में खतरा ऊंचा था। मुख्य भूमि और कोर्सिका के सभी समुद्री तटों पर समुद्र की सतह का तापमान भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा।
मेटेओ-फ्रांस के आकलन में मानव-जनित जलवायु परिवर्तन के बिना इतनी तीव्र गर्मी लगभग असंभव होती, हालांकि आज की जलवायु में भी यह दुर्लभ है। संस्था ने देशभर में सामान्य से 20 प्रतिशत अधिक धूप भी दर्ज की, जो अब तक का सबसे ऊंचा ग्रीष्मकालीन आंकड़ा है। हाल की बारिश के बावजूद सूखी वनस्पति सितंबर तक आग की ऋतु बढ़ा सकती है और ये निष्कर्ष गर्मी, पानी की कमी तथा पारिस्थितिकी तंत्र की क्षति के लिए मजबूत तैयारी की जरूरत दिखाते हैं।
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