लॉस एंजिलिस के एक संघीय न्यायाधीश ने 28 अक्टूबर को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन की वह तत्काल मांग खारिज कर दी जिसमें कैलिफोर्निया के लगभग 20,000 लोगों से जुड़े डाक मतपत्र अलग रखने को कहा गया था। प्रशासन का आरोप है कि ये लोग संभवतः अमेरिकी नागरिक नहीं हैं। एसोसिएटेड प्रेस और अदालत के लिखित आदेश में दी गई जानकारी के अनुसार जिला न्यायाधीश डेविड कार्टर ने अस्थायी रोक लगाने से इनकार किया। विवाद तीन नवंबर के मध्यावधि चुनाव से पहले आया है, जो कांग्रेस का नियंत्रण तय करेगा।
न्याय विभाग ने अमेरिका के आंतरिक सुरक्षा विभाग के सहयोग और समर्थन से 15 अक्टूबर को मुकदमा दायर किया था। उसके बयान के मुताबिक जांचकर्ताओं ने मतदाता रिकॉर्ड और अतिरिक्त सत्यापन विधियों से संभावित गैरनागरिकों की पहचान की। विभाग ने कैलिफोर्निया के अधिकारियों से दी गई नामों की सूची की जांच करने और अयोग्य लोगों के वोट गिनने से रोकने को कहा। गैरनागरिक संघीय चुनावों में कानूनी रूप से मतदान नहीं कर सकते; लेकिन विवादित सूची में नाम होना आरोप है, अवैध मतदान का निष्कर्ष नहीं।
राज्य और स्थानीय चुनाव अधिकारियों ने सूची की विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। एनपीआर के मुताबिक लॉस एंजिलिस काउंटी की प्रारंभिक जांच में कई लोगों के सक्रिय मतदाता पंजीकरण नहीं मिले। राज्य ने यह भी कहा कि मतदान और डाक मतपत्रों का प्रसंस्करण जारी रहने के बीच प्रक्रिया बदलना अव्यावहारिक होगा और पात्र नागरिकों को उनके वोट से वंचित कर सकता है। एपी के अनुसार राज्य में 37 लाख से अधिक लोग पहले ही वोट दे चुके थे।
कार्टर ने अपने लिखित अदालती आदेश में स्पष्ट किया कि मांगा गया हस्तक्षेप जारी चुनाव बाधित करेगा और मतदाताओं तथा चुनाव कर्मियों की सुरक्षा कमजोर करेगा। उन्होंने चुनावों पर राज्यों के अधिकार पर जोर दिया और अनिश्चित प्रक्रिया से निकले आरोपों के आधार पर पंजीकृत मतदाताओं के अधिकार सीमित करने से इनकार किया। अदालत ने मौजूदा विकल्प बताए: अवैध मतदान पर संघीय अभियोजन और अयोग्यता साबित होने पर पंजीकरण रद्द करने की कैलिफोर्निया की प्रक्रिया।
कैलिफोर्निया के अटॉर्नी जनरल रॉब बोंटा ने फैसले का स्वागत करते हुए इसे पहले के अपीलीय निर्णय के बाद एक और जीत बताया। यह फैसला तत्काल राहत की मांग पर है, मुकदमे का अंतिम निपटारा नहीं। सीबीएस के अनुसार न्याय विभाग अपील करने की योजना बना रहा है। फिलहाल संबंधित डाक मतपत्रों को अलग रखे जाने का मांगा गया संघीय आदेश नहीं मिला है और मतदान दिवस में एक सप्ताह से कम बचा है।
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