अमेरिका के पश्चिमी तट पर उत्तर की ओर बढ़ती केल्विन तरंगों के कारण इस महीने समुद्र का स्तर लगभग 30 सेंटीमीटर तक बढ़ सकता है। तीन अक्टूबर को प्रकाशित एसोसिएटेड प्रेस और एएफपी की रिपोर्टों में यह जानकारी दी गई। वैज्ञानिकों ने चेताया कि अल नीनो से जुड़ी गर्म पानी की ये तरंगें ऊंचे ज्वार और तूफानों के साथ आने पर तटीय बाढ़ तथा समुद्र तटों के कटाव का खतरा बढ़ा सकती हैं।
एपी के अनुसार, निकट आ रही तरंग जलस्तर को लगभग 15 से 30 सेंटीमीटर ऊपर उठा सकती है और इसका असर कैलिफोर्निया से ओरेगन तथा वॉशिंगटन राज्य की ओर फैल सकता है। एजेंसी से बात करने वाले विशेषज्ञ अक्टूबर से फरवरी के बीच और तरंगों की उम्मीद कर रहे हैं। ये आंकड़े संभावित वृद्धि बताते हैं, पूरे तट पर पहले से दर्ज माप नहीं हैं।
यह घटना सुनामी या किनारे पर टूटने वाली लहर से अलग है। एएफपी ने इसे तट के साथ आगे बढ़ने वाला पानी का चौड़ा और लगातार बना रहने वाला उभार बताया। एनओएए की मत्स्य सेवा के वैज्ञानिक विवरण के अनुसार, भूमध्यरेखीय हवाएं कमजोर पड़ने या दिशा बदलने पर ऐसी तरंगें पैदा करती हैं जो प्रशांत महासागर में पूर्व की ओर जाती हैं, फिर अमेरिकी तट के साथ उत्तर की ओर मुड़ती हैं।
नॉर्थ कैरोलाइना स्टेट यूनिवर्सिटी के समुद्री वैज्ञानिक डिलन अमाया ने एएफपी को बताया कि ऊंचा जलस्तर तूफानी जलवृद्धि, बड़ी लहरों और असाधारण ऊंचे ज्वार का प्रभाव बढ़ा सकता है। उन्होंने समझाया कि गर्म पानी फैलता भी है, जिससे स्तर और बढ़ता है। इसलिए खतरा केवल तरंग पर नहीं, बल्कि समुद्र और मौसम की परिस्थितियों के मेल पर निर्भर करता है।
पर्यावरण संबंधी चिंताएं सतह के नीचे तक जाती हैं। एनओएए की मत्स्य सेवा बताती है कि केल्विन तरंगें ऊपरी गर्म पानी और नीचे के ठंडे पानी की सीमा को अधिक गहराई तक धकेलती हैं। अल नीनो उन हवाओं को भी कमजोर कर सकता है जो सामान्यतः पोषक तत्वों से भरपूर ठंडा पानी ऊपर लाती हैं। साथ मिलकर ये प्रक्रियाएं तटीय पानी को गर्म करती और समुद्री जीवन की परिस्थितियां बदलती हैं।
एनओएए का कैलिफोर्निया धारा आकलन लंबे समय तक बनी गर्मी को समुद्री संसाधनों के लिए बड़ा जोखिम मानता है, खासकर जब मौजूदा समुद्री हीटवेव के बाद अल नीनो आता है। एजेंसी उपग्रहों, सर्वेक्षणों और साझेदार संस्थानों के जरिए पारिस्थितिकी तंत्र की निगरानी कर रही है तथा मछुआरों से असामान्य घटनाओं की जानकारी मांग रही है। यह निगरानी शरद और सर्दियों की तरंगों के आने पर परिस्थितियों में बदलाव को समझने में मदद करेगी।
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