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पलायन के नौ साल बाद रोहिंग्या शरणार्थियों ने सुरक्षित वापसी की मांग की

प्रकाशित 25 अगस्त 2026 0 दृश्य

बांग्लादेश के कॉक्स बाजार शिविरों में मंगलवार को हजारों रोहिंग्या शरणार्थियों ने रैली कर म्यांमार में सुरक्षित और सम्मानजनक वापसी की मांग की। रखाइन प्रांत में सैन्य अभियान से हुए सामूहिक पलायन के नौ वर्ष पूरे होने पर यह प्रदर्शन आयोजित हुआ। एसोसिएटेड प्रेस के अनुसार दर्जनों शिविरों में सभाएं हुईं और आयोजकों ने किसी भी प्रत्यावर्तन से पहले नागरिकता, सुरक्षा, न्याय तथा आवागमन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने को कहा।

यह वर्षगांठ अगस्त 2017 में म्यांमार के सुरक्षा बलों द्वारा एक रोहिंग्या विद्रोही समूह के हमलों के बाद शुरू किए गए अभियान की याद दिलाती है, जिसके कारण सात लाख से अधिक लोग भागे थे। जीवित बचे लोगों ने हत्याओं, यौन हिंसा और गांवों के विनाश का विवरण दिया। म्यांमार इसे आतंकवाद विरोधी कार्रवाई कहता है, जबकि संयुक्त राष्ट्र के अधिकारियों और कई सरकारों ने हिंसा को जातीय सफाया या नरसंहार बताया है।

क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों में दिए आंकड़ों के अनुसार बांग्लादेश में अब लगभग 12 लाख रोहिंग्या हैं, जिनमें अधिकांश कॉक्स बाजार जिले के उखिया और टेकनाफ के भीड़भाड़ वाले शिविरों में रहते हैं। शरणार्थी आबादी में तीन चौथाई से अधिक महिलाएं और बच्चे हैं। वापसी के दो पुराने प्रयास विफल रहे क्योंकि शरणार्थियों ने रखाइन को असुरक्षित बताया और कहा कि उनके अधिकार सुनिश्चित नहीं हैं। बांग्लादेश का कहना है कि किसी को जबरन नहीं भेजा जाएगा।

म्यांमार में 2021 के सैन्य तख्तापलट और गृहयुद्ध के फैलाव ने वापसी को और कठिन बनाया है। सरकारी बलों से लड़ते हुए अराकान आर्मी ने रखाइन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण कर लिया और नई हिंसा से अन्य रोहिंग्या भी विस्थापित हुए। शरणार्थी प्रतिनिधियों का कहना है कि विश्वसनीय योजना में परिवारों को नागरिकता, सुरक्षा, बुनियादी अधिकार और अत्याचारों की जवाबदेही के साथ उनके मूल समुदायों में लौटने का अवसर मिलना चाहिए।

दाता सहायता घटने से बांग्लादेश में स्थितियां भी बिगड़ रही हैं। अल जजीरा के अनुसार 2026 की संशोधित मानवीय अपील 26 प्रतिशत घटाकर 71 करोड़ 5 लाख डॉलर कर दी गई और इसे सबसे आवश्यक जीवनरक्षक जरूरतों तक सीमित किया गया। कटौती से भोजन, शिक्षा और संरक्षण सेवाओं पर दबाव बढ़ा है, जबकि सुरक्षा और अवसर की तलाश में शरणार्थियों की बंगाल की खाड़ी और अंडमान सागर की खतरनाक यात्राएं जारी हैं।

अंतरराष्ट्रीय कानूनी और कूटनीतिक प्रयास अब भी अधूरे हैं। अंतरराष्ट्रीय न्यायालय ने जनवरी में गाम्बिया की उस याचिका पर सुनवाई की जिसमें म्यांमार पर नरसंहार संधि के उल्लंघन का आरोप है, लेकिन अंतिम फैसला नहीं आया। ढाका में सोलह राजनयिक मिशनों ने इस सप्ताह रोहिंग्या लोगों की वापसी के अधिकार का समर्थन किया। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि संकट के दूसरे दशक में प्रवेश से पहले इन बयानों को लागू करने योग्य सुरक्षा और अधिकार गारंटी में बदला जाए।

स्रोत: Associated Press, Al Jazeera, Anadolu Agency, bdnews24.com

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