होम पर वापस जाएं वैज्ञानिकों ने अल्जाइमर और डिमेंशिया में मस्तिष्क कोशिका मृत्यु की छिपी हुई प्रक्रिया की खोज की विज्ञान

वैज्ञानिकों ने अल्जाइमर और डिमेंशिया में मस्तिष्क कोशिका मृत्यु की छिपी हुई प्रक्रिया की खोज की

प्रकाशित 7 जुलाई 2026 664 दृश्य

किंग्स कॉलेज लंदन के शोधकर्ताओं की एक टीम ने मस्तिष्क कोशिका मृत्यु की एक ऐसी प्रक्रिया की पहचान की है जिसे पहले नजरअंदाज किया गया था और जो अल्जाइमर रोग तथा फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया में केंद्रीय भूमिका निभाती प्रतीत होती है। कैरियोप्टोसिस के नाम से जानी जाने वाली यह प्रक्रिया न्यूरॉन्स के अंदर विषाक्त प्रोटीन के जमा होने के बाद कोशिका नाभिक के क्रमिक संकुचन और अंततः विघटन से संबंधित है। नेचर कम्युनिकेशंस पत्रिका में प्रकाशित ये निष्कर्ष न्यूरोडीजेनेरेशन की वैज्ञानिक समझ को बदल सकते हैं और उपचार के नए रास्ते खोल सकते हैं।

दशकों से वैज्ञानिक जानते रहे हैं कि विषाक्त प्रोटीन का संचय, जिसमें बीटा-एमिलॉयड प्लाक और टाऊ प्रोटीन की गुत्थियां शामिल हैं, अल्जाइमर रोग और फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया की पहचान है। हालांकि, ये प्रोटीन मस्तिष्क कोशिकाओं को किस प्रकार नष्ट करते हैं, इसकी सटीक प्रक्रिया अब तक अस्पष्ट बनी हुई थी। यूके डिमेंशिया रिसर्च इंस्टीट्यूट की डॉ. रेबेका कैसटर्टन और मनोचिकित्सा, मनोविज्ञान एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान के डॉ. मैनोलिस फैंटो के नेतृत्व में टीम ने कंप्यूटेशनल एल्गोरिदम का उपयोग करते हुए 28 रोगियों की लगभग 3,000 मस्तिष्क कोशिकाओं का विश्लेषण किया।

विश्लेषण में पता चला कि अल्जाइमर रोगियों की ललाट प्रांतस्था की 35 प्रतिशत कोशिकाओं में कैरियोप्टोसिस के स्पष्ट मार्कर पाए गए, जबकि स्वस्थ वृद्ध नियंत्रण समूह में यह अनुपात केवल 15 प्रतिशत था। आणविक स्तर पर, शोधकर्ताओं ने पी38 एमएपी काइनेज और लैमिनबी1 प्रोटीन के बीच एक महत्वपूर्ण अंतःक्रिया की पहचान की जो कोशिका नाभिक की बाहरी झिल्ली को अस्थिर करती है और उसके विघटन को शुरू करती है। यह काइनेज-प्रोटीन अंतःक्रिया एक आणविक स्विच की तरह काम करती है जो विषाक्त प्रोटीन संचय द्वारा सक्रिय होने पर कोशिका को मृत्यु की अपरिवर्तनीय दिशा में ले जाती है।

महत्वपूर्ण बात यह है कि जब शोध टीम ने चूहे के न्यूरॉन्स पर प्रयोगशाला प्रयोगों में इन आणविक स्विचों को अवरुद्ध किया, तो कैरियोप्टोसिस मार्करों में उल्लेखनीय कमी देखी गई। इससे पता चलता है कि पी38 एमएपी काइनेज-लैमिनबी1 मार्ग में बाधा डालने से अल्जाइमर और फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया दोनों में होने वाली प्रगतिशील न्यूरोनल हानि को संभावित रूप से धीमा या रोका भी जा सकता है। डॉ. कैसटर्टन ने कहा कि टीम ने कैरियोप्टोसिस की कार्यप्रणाली का मानचित्रण शुरू कर दिया है।

अध्ययन को अल्जाइमर्स रिसर्च यूके, जैव प्रौद्योगिकी एवं जैव विज्ञान अनुसंधान परिषद, यूके चिकित्सा अनुसंधान परिषद और यूके डिमेंशिया रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा वित्त पोषित किया गया था। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार अल्जाइमर रोग विश्व भर में लगभग 5.5 करोड़ लोगों को प्रभावित करता है और 2050 तक यह संख्या लगभग तीन गुनी हो सकती है।

भविष्य के अनुसंधान पी38 एमएपी काइनेज-लैमिनबी1 अंतःक्रिया के चयनात्मक अवरोधन पर केंद्रित होंगे ताकि मानव नैदानिक परीक्षणों के लिए व्यवहार्य उपचार उम्मीदवार विकसित किए जा सकें। किंग्स कॉलेज लंदन की टीम दवा कंपनियों के साथ सहयोग करने की योजना बना रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या मौजूदा काइनेज अवरोधकों को मानव मस्तिष्क में कैरियोप्टोसिस से लड़ने के लिए पुनर्उपयोग किया जा सकता है, जो दुनिया भर में करोड़ों डिमेंशिया रोगियों और उनके परिवारों को आशा प्रदान कर सकता है।

स्रोत: Nature Communications, King's College London, ScienceDaily, Alzheimer's Research UK, News-Medical.net

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